राजेश बैरागी।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण आमतौर पर प्रतिदिन अतिक्रमण, अवैध कब्जों और अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध अभियान चलाता है। नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों में ऐसे अभियान यदा-कदा ही चलाए जाते हैं। क्या इन दोनों प्राधिकरणों और जीडीए में इस प्रकार के अभियानों को लेकर सैद्धांतिक रूप से मतभिन्नता है?या नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपनी अर्जित भूमि पर अतिक्रमण तथा अधिसूचित क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को लेकर जरा भी फिक्रमंद नहीं हैं?
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के एक उच्चाधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि उनके यहां प्रवर्तन प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी लेने की अधिकारियों में होड़ लगी रहती है। प्रवर्तन प्रकोष्ठ प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण, अवैध कब्जों तथा अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करते हैं। यह कार्रवाई प्रवर्तन प्रकोष्ठों की मोटी आमदनी का जरिया मानी जाती है। यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह कुछ वर्ष पूर्व जब जीडीए उपाध्यक्ष थे,तब प्रवर्तन प्रकोष्ठों की कालाबाजारी की चहुंओर चर्चा रहती थी। हालांकि कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक तो नहीं लगी है परंतु वर्तमान उपाध्यक्ष अतुल वत्स की सख्ती के चलते जीडीए के प्रवर्तन प्रकोष्ठ मुरादनगर, मोदीनगर,लोनी तक और साहिबाबाद क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं। जीडीए में जहां प्रवर्तन प्रकोष्ठों के प्रभारी और विशेष कार्याधिकारी बनने की होड़ लगी रहती है, वहीं नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों में प्रवर्तन की कार्रवाई करने को कोई तैयार नहीं है। हालांकि गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने आज एक प्रेस नोट जारी कर बताया है कि इस वर्ष में अब तक कमिश्नरेट पुलिस की सुरक्षा में नोएडा ग्रेटर नोएडा की कितनी भूमि अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है। परंतु ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र का हाल तो यह है कि फेज दो के चिटेहरा बाईपास पर भूमाफियाओं ने दिल्ली एनसीआर नामक इंडस्ट्रीयल टाउनशिप खड़ी कर दी है और बाकायदा विभिन्न प्रचार माध्यमों से इस अवैध टाउनशिप में औद्योगिक भूखंड खरीदने के लिए ग्राहकों को आमंत्रित किया जा रहा है। इसी प्रकार गुलिस्तान पुर गांव की सैकड़ों बीघा भूमि पर इंद्रलोक पुरम बसाया जा रहा है। इस संबंध में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी कार्रवाई करने की बात तो करते हैं परंतु कार्रवाई करते नहीं हैं। चर्चा है कि जीडीए में कार्रवाई करने से काली कमाई होती है, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी बगैर कार्रवाई किए ही मोटी कमाई कर रहे हैं। कार्रवाई न करने के लिए परियोजना/अभियांत्रिकी विभाग भूलेख विभाग पर सही खसरा संख्या न बताने की तोहमत लगाकर छुट्टी पा लेता है तो भूलेख विभाग के लेखपाल अवैध कब्जा करने वालों से सीधे अपने रिश्तेदारों के नाम भूमि का बैनामा ही करा रहे हैं
जीडीए वर्सेज नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण: अवैध कॉलोनियों और कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई में जमीन आसमान का अंतर











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