राजेश बैरागी।दूरदर्शन के पर्दे पर आज दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों पर बजबजाती गंदगी वाला जलभराव दिखाई दिया। क्या यह रौद्र रूप में बह रही यमुना का जल हो सकता है? सरकारी दावों के अनुसार अभी तक यमुना के जल ने दिल्ली में तटबंधों का अतिक्रमण नहीं किया है। तो क्या आसमान से बरस रही वर्षा के जल की निकासी का दिल्ली में उचित प्रबंध नहीं है? परंतु जब यमुना का जल स्तर सामान्य होता है,तब दिल्ली में बरसात का पानी इस प्रकार सड़कों पर भरा दिखाई नहीं देता है। मैं इतने सारे प्रश्नों की सहायता से अपनी बात समझाने का प्रयास कर रहा हूं कि आखिर बरसात और यमुना में बाढ़ से दिल्ली में बजबजाती गंदगी वाले जलभराव का रिश्ता क्या है? दरअसल जिस यमुना नदी को कुछ दिनों पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मां कहकर उसे पवित्र बनाने के संकल्प की घोषणा की थी, सामान्य दिनों में यह सारी गंदगी सीधे यमुना में जाती है। पिछले कई दिनों से यमुना उफान पर है।उसका जल अभी तटबंधों के नियंत्रण में है परंतु उसने दिल्ली की गंदगी भरे जल को लेना बंद कर रखा है। लिहाजा बारिश के जल ने दिल्ली की उस गंदगी को सतह पर ला दिया है जिससे यमुना मैली होती है।मेरे मन में हमेशा एक प्रश्न बना रहता है कि बारिश क्यों होती है? विद्वान लोग इसे प्राकृतिक रूप से धरती की प्यास बुझाने की व्यवस्था करार देते हैं।मेरा मानना है कि महानगरों में बारिश वहां की जल निकासी और कूड़े कचरे के छद्म निस्तारण की पोल खोलने के लिए होती है। क्या यमुना स्वाभाविक रूप से मैली है? यमुना को वास्तव में सफाई की आवश्यकता नहीं है।उसे मैली होने से बचाने की आवश्यकता है। सरकार और उसके कारिंदे यमुना को साफ करने के लिए उसे गंदा करते हैं। फिलहाल यमुना ने उनके गंदे इरादों पर रोक लगा रखी है
यमुना में बाढ़ तो दिल्ली में गंदगी











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