लोहिया नाला कहें कि हवेलिया ड्रेन? *ग्रेटर नोएडा की एक ड्रेन के दो नाम और अलग अलग नामों से साफ करने के करोड़ों रुपए के दो प्रोजेक्ट

_-राजेश बैरागी-_

जनता के धन को जनहित में खर्च करने के नाम पर कैसी-कैसी योजनाओं को गढ़ा जाता है, इसका एक जीता जागता उदाहरण ग्रेटर नोएडा में बह रहे एक बरसाती नाले को स्वच्छ करने के लिए की जा रही कवायदें हैं।आम जनता इसे लोहिया खाल या लोहिया नाले के नाम से पुकारती है। सभ्य समाज के कुछ लोग इसे हवेलिया ड्रेन कहते हैं। यह नाला नोएडा दादरी रोड को सूरजपुर से लगभग दो किलोमीटर दादरी की ओर चलने पर पार करता है। पीछे कहां से आता है उस बिंदु को तलाशे बगैर यह जान लीजिए कि इसमें सूरजपुर वेटलैंड का पानी बहता है। नोएडा दादरी रोड पार करते ही यूपीसीडा का औद्योगिक क्षेत्र साइट बी व सी आ जाता है जिसका समस्त प्रदूषित जल और मल इसी नाले में गिरता है। हालांकि यूपीसीडा अपनी सभी औद्योगिक इकाइयों में ट्रीटमेंट प्लांट लगा होने और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग उन ट्रीटमेंट प्लांट के चालू होने की कसमें खाते हैं। इसके बावजूद इस नाले के पास से नाक पर रूमाल रखे बगैर निकलना मुश्किल है। आगे चलकर सूरजपुर कासना रोड के समानांतर सेक्टर पी-4 पुल के नीचे इस नाले में इकोटेक थर्ड से निकलने वाला एक और गंदा नाला इसमें मिलता है। दोनों नाले एक होकर आगे हिंडन नदी में अपनी समस्त गंदगी के साथ जा गिरते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस नाले की सफाई के लिए पिछले कई सालों से विचार कर रहा है। इस बीच यूपी स्टेट ट्रांसफोर्मेशन कमीशन यानी उत्तर प्रदेश के नीति आयोग की निगाहें इस नाले पर पड़ गई हैं।यूपीएसटीसी ने इस नाले को हवेलिया ड्रेन के नाम से साफ करने के लिए गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के अनुसार मात्र डीपीआर बनाने (साफ करना शामिल नहीं है) के लिए जीबीयू को दो करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस विश्वविद्यालय को इस प्रकार के कार्यों का कोई अनुभव नहीं है। लिहाजा जीबीयू ने पहले इसके लिए रुड़की प्रोद्योगिकी संस्थान से संपर्क साधा। अब टेंडर के जरिए एक निजी फर्म को ₹4480000/- में डीपीआर बनाने का ठेका दिया जा रहा है।उधर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इसी नाले को लोहिया नाला मानते हुए इसकी सफाई तथा सौंदर्यीकरण के लिए लगभग बीस करोड़ रुपए की परियोजना तैयार कर रहा है। इस परियोजना में सेक्टर गामा-1 के पीछे इस नाले को लगभग सात सौ मीटर लंबाई में एक विशेष तकनीक से पक्का करने जिससे नाले में बहने वाला गंदा पानी खुद ब खुद साफ हो जाएगा तथा नाले के दोनों पुश्तों को टहलने योग्य विकसित कर उसे प्रकाशित भी किया जाएगा। स्मरण रहे कि गामा-1 में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की कॉलोनी के ठीक पीछे से यह नाला दुर्गंध उड़ाता हुआ बहता है। यहां यह जानना आवश्यक है कि यूपी ट्रांसफोर्मेशन कमीशन के निर्देश पर जीबीयू द्वारा बनवाई जाने वाली डीपीआर में मौखिक निर्देश हैं कि डीपीआर बनाने वाली फर्म को इस लोहिया उर्फ हवेलिया नाले को साफ करने के लिए एसटीपी लगाने का ही सुझाव देना है। हालांकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का अभियांत्रिकी विभाग इस नाले की सफाई के लिए एसटीपी लगाने से इत्तेफाक नहीं रखता है।(नेक दृष्टि)

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