
_-राजेश बैरागी-_
समय गुजरने के साथ अपराध और दंड कैसे अदृश्य हो जाते हैं,इसका ताजा उदाहरण नोएडा प्राधिकरण द्वारा 20 सितंबर 2022 को सेक्टर 21 जलवायु विहार की एक दीवार गिरने से चार मजदूरों की मौत मामले के जिम्मेदार ठेकेदार को क्लीन चिट देने के साथ उसकी जब्त की गई धनराशि को भी जारी करने से लिया जा सकता है।क्या नोएडा प्राधिकरण में आजकल वर्षों से विवादित चल रहे मृतप्राय मामलों के जिंदा होने और उन मामलों को सेटल करने का सुनहरा दौर चल रहा है?स्मरण हो कि ठीक चार वर्ष पहले 20 सितंबर 2022 को नोएडा के सेक्टर 21 जलवायु विहार में नाले की मरम्मत के दौरान साथ खड़ी दीवार के भरभराकर गिर जाने से बिना सुरक्षा उपायों के काम कर रहे 13 मजदूर दब गए थे। इनमें से चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चारों मजदूरों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए मुआवजा दिया था। इस घटना में ठेकेदार फर्म की घोर लापरवाही उजागर हुई थी। यह भी राज उजागर हुआ था कि ठेकेदार फर्म ने यह काम लेबर ठेकेदार गुलमौहम्मद को दे रखा था जबकि ठेके की शर्तों के अनुसार ऐसा नहीं किया जा सकता था।इस घटना के लिए जिम्मेदार ठेकेदार मैसर्स एम डी प्रोजेक्ट एंड कंस्ट्रक्शन्स को प्राधिकरण ने ब्लैक लिस्ट करने के साथ उसकी ₹320000/- धरोहर राशि तथा ₹3440000/- परफॉर्मेंस गारंटी राशि जब्त कर ली थी। ठेकेदार फर्म ने प्राधिकरण की बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई को उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चुनौती दी। न्यायालय ने प्राधिकरण के आदेश को निरस्त करते हुए ठेकेदार फर्म को सुनवाई का अवसर देकर पुनः एक उचित प्रशासनिक निर्णय लेने का आदेश दिया। प्राधिकरण ने ठेकेदार फर्म का पक्ष सुना परंतु कोई नया आदेश जारी नहीं किया। इसके स्थान पर ठेकेदार फर्म के प्रत्यावेदन पर कार्रवाई करते हुए विधि विभाग से विधिक राय मांगी।विधि विभाग ने घुमाफिरा कर ठेकेदार फर्म को एक प्रकार से क्लीन चिट दे दी।यह विधिक राय संविदा पर नियुक्त सहायक विधि अधिकारी से ली गई।अब प्रश्न यह अनुत्तरित रह गया है कि उस घटना में चार मजदूरों की मौत के लिए कोई जिम्मेदार था भी या नहीं या वो एक एक्ट ऑफ गॉड था जिसके लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।(नेक दृष्टि)
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