नोएडा प्राधिकरण वर्सेज बिल्डर विवाद *गोल्फ ग्रीन रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड मामले में विधि विभाग की पैरवी से सुप्रीम जीत

-राजेश बैरागी-_

नोएडा प्राधिकरण के विधि विभाग के प्रयासों से एक बिल्डर द्वारा 2013 में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाए जाने के दौरान भुगतान पर लगे अर्थदंड को चुनौती देने वाली याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी है। यह विशेष अनुमति याचिका 2023 से लंबित चल रही थी।सर्वोच्च न्यायालय ने नोएडा सेक्टर 79 स्थित स्पोर्ट्स सिटी में गोल्फ ग्रीन रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड की विशेष अनुमति याचिका गत 8 अक्टूबर को सुनवाई के बाद खारिज कर दी। यह याचिका खारिज होने से नोएडा प्राधिकरण को बिल्डर के विरुद्ध बकाया करोड़ों रुपए मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उल्लेखनीय है कि 15 जून 2012 को अस्तित्व में आई गोल्फ ग्रीन रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर कंपनी को नोएडा प्राधिकरण ने 19 अक्टूबर 2012 को छः एकड़ का एक भूखंड संख्या एससी01/डी-4 सेक्टर 79 आवंटित किया था। निर्माण की समयावधि के दौरान 2013 में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने नोएडा बर्ड सेंचुरी के 10 किलोमीटर के दायरे में भवन निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगा दी थी। पाबंदी के समय को शून्य घोषित करते हुए कुछ बिल्डर प्रोजेक्ट को मूल धनराशि पर लगने वाले ब्याज से छूट प्रदान की गई थी। छूट योजना में यह प्रोजेक्ट शामिल नहीं था। इसके बावजूद छूट पाने के लिए गोल्फ ग्रीन रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में सिविल अपील दायर की जो 2023 में खारिज हो गई। उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की।इसे प्राधिकरण के विशेष विधि सलाहकार/प्रभारी वी के सिंह के निर्देशन में प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप निरस्त कराने में सफलता मिली। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बिल्डरों द्वारा प्राधिकरणों का भूमि का पैसा और भवन भूखंड खरीदारों का पैसा हजम करने के लिए किसी न किसी बहाने प्रोजेक्ट को अदालती कार्रवाइयों में उलझाकर रखा जाता है। इस धंधे में प्राधिकरणों के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध रहती है। ऐसे में किसी मामले में प्राधिकरण को सफलता मिलना अभूतपूर्व बात हो जाती है।(नेक दृष्टि)

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