
_-राजेश बैरागी-_
देश में सभी स्थानों पर मिलावटी और किसी हद तक जहरीले खान-पान की बिक्री खुलेआम होती है।दूध से शराब तक और आटे से फल-सब्जियों तक में मिलावट का बाजार हमेशा गर्म रहता है। हमारी थाली, कटोरी,गिलास,दोने में परोसा जा रहा खाना मिलावटी होने के साथ जहरीला भी है जिससे हम सभी स्वास्थ्य चुनौतियों में भी फंसते जा रहे हैं।चूंकि मांग और आपूर्ति का चोली दामन का साथ होता है, इसलिए त्योहारी सीजन आते ही ऐसे खाद्य पदार्थों की बाढ़ आ जाती है।हालांकि मूल रूप में कोई भी खाद्य पदार्थ न मिलावटी होता है और न अधोमानक ही होता है। यह व्यापारियों का खुला खेल है जिसमें अधिक मुनाफा कमाने के लिए सस्ता,कम मूल्य में अधिक मात्रा, स्वादिष्ट और आकर्षक बनाने के तरीकों से देश के नागरिकों के समक्ष एक ऐसा बाजार खड़ा कर दिया गया है जहां असली-नकली में भेद करना भी असंभव हो गया है। ऐसे माहौल में मिलावटी और अधोमानक खाद्य पदार्थों से नागरिकों को बचाने की जिम्मेदारी प्रत्येक राज्य में औषधि एवं खाद्य नियंत्रण विभाग की होती है। महाराष्ट्र के औषधि एवं खाद्य विभाग के आयुक्त आईएएस तुकाराम मुंढे आजकल अपनी छापेमारी और नकली खाद्य पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाइयों को लेकर चर्चाओं में हैं। उन्हें अभी हाल ही में भी 2026 में इस पद पर नियुक्त किया गया था।तब से अब तक चार महीने में उन्होंने ग्यारह सौ से अधिक छापे मारकर और 56 रेस्तराओं पर ताले लगाकर खूब वाहवाही लूटी है। इनमें से एक मुंबई हाईकोर्ट की कैंटीन भी है जिसके लिए उन्हें हाईकोर्ट की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा था। क्या इस प्रकार की कार्रवाई केवल महाराष्ट्र में और तुकाराम मुंढे के द्वारा ही की जा रही है? उत्तर प्रदेश की खाद्य आयुक्त और सचिव चर्चित आईएएस अधिकारी डॉ रौशन जैकब पिछले वर्ष सितंबर में इस पद पर आसीन हुईं थीं। उन्होंने अब तक साढ़े तीन हजार से अधिक स्थानों पर छापे डलवाने की कार्रवाई की है। खाद्य विभाग की कार्य निर्देशिका के अनुसार छापे या जांच के दौरान मिलावटी समझे जाने वाले खाद्य पदार्थ का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा जाता है और मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होती है। इससे बहुत से मिलावटी सामान बनाने बेचने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई केवल औपचारिक बन कर रह जाती है।डॉ रौशन जैकब ने बड़ी मात्रा में मिलावट का सामान मिलने पर एफआईआर कराने के आदेश दिए।अब तक ऐसे 18 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है। हालांकि मिलावट के बाजार के साइज के हिसाब से यह संख्या मामूली है। तुकाराम मुंढे से पहले से ही डॉ रौशन जैकब स्वयं फील्ड में उतरकर छापेमारी की कार्रवाइयों का नेतृत्व करती रही हैं। आंकड़ों में देखें तो प्रयागराज, संतकबीरनगर, पिलखुवा,मेरठ, मुजफ्फरनगर, संभल, मथुरा, बदायूं, लखनऊ जैसे स्थानों पर हुई छापेमारी की कार्रवाइयों में हजारों किलोग्राम मिलावटी घी,दूध,पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों को न केवल पकड़ कर जब्त किया गया बल्कि बहुत से नकली खाद्य पदार्थ को मौके पर नष्ट कराने के साथ इन पदार्थों के निर्माताओं और विक्रेताओं के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं। हालांकि तुकाराम मुंढे हों या डॉ रौशन जैकब,इन अधिकारियों की नियुक्ति तो इस प्रकार की कार्रवाई करने और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा के लिए ही की जाती है। परंतु नौकरी को मौज करने और धन कमाने का साधन बनाने के इस दौर में जब कोई तुकाराम मुंढे या डॉ रौशन जैकब अपने कर्तव्यों को निष्ठा के साथ निभाते हैं तो उनकी चर्चा होने ही लगती है।दो अलग-अलग राज्यों के इन अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की चर्चा इसलिए भी होती है कि इन्हें कई बार अपने कर्तव्यों को निष्ठा से निभाने की सजा भी मिली है जिसमें इन्हें बेवजह तबादलों का दंश भी झेलना पड़ा है।(नेक दृष्टि)
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