आगामी विधानसभा चुनाव की अघोषित तैयारियों के बीच: पार्टी निष्ठा पर भारी पड़ रही है टिकट हासिल करने की जद्दोजहद, परस्पर विरोधी दलों के नेताओं से मिल रहे हैं विधायक और संभावित प्रत्याशी

_-राजेश बैरागी-_

2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव की अघोषित तैयारियों के बीच क्या मौजूदा विधायक और संभावित प्रत्याशियों की अपने राजनीतिक दलों के प्रति निष्ठा डगमगा रही है? सूत्र बता रहे हैं कि अधिकांश विधायक और आगामी चुनाव में किस्मत आजमाने की तमन्ना रखने वाले संभावित प्रत्याशी एक से अधिक दलों के साथ संपर्क साध रहे हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि सबसे अधिक सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक आसन्न खतरा भांप कर टिकट के लिए यहां वहां सभी जगह हाजिरी लगा रहे हैं।यदि निर्धारित समय पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होते हैं तो भी आने वाले छः महीने में चुनाव की पूरी बिसात बिछ चुकी होगी। हमेशा की भांति इस बार भी बड़े और मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक दलों से टिकट हासिल करने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक रहेगी। सबसे बड़ी भीड़ निस्संदेह सत्तारूढ़ भाजपा के दरवाजे पर रहेगी। इसलिए टिकट कटने का खतरा सबसे अधिक भाजपा विधायकों को ही है। वैसे भी एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा एक तिहाई नये उम्मीदवार मैदान में उतारती है।वो एक तिहाई मौजूदा विधायक कौन होंगे,इसको लेकर सभी विधायकों में अपने टिकट कटने को लेकर भय का माहौल है। वैसे भी योगी मोदी के नाम व पहचान के अलावा अधिकांश विधायकों के पास अपने जनाधार की खास जमा-पूंजी है भी नहीं जिसके बल पर उनकी दावेदारी को खारिज करना मुश्किल हो। भाजपा नीत अन्य राज्यों में तो मुख्यमंत्री स्तर के नेताओं को खारिज करने में देर नहीं की गई। ऐसे में आसन्न संकट को देखते हुए अधिकांश विधायक और संभावित प्रत्याशियों ने एक से अधिक दलों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। सैंपल के तौर पर गौतमबुद्धनगर जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायक भाजपा के हैं। इनमें से नोएडा से विधायक पंकज सिंह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पुत्र होने के नाते टिकट कटने का कोई खतरा नहीं है परंतु शेष दोनों विधानसभा सीटों दादरी व जेवर विधायकों को लेकर तमाम चर्चाएं चल निकली हैं।माना जा रहा है कि दोनों विधायकों को टिकट बचाना टेढ़ी खीर हो सकता है। दादरी सीट पर भाजपा से टिकट हासिल करने के लिए धनपतियों से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से निकट संबंध होने का दावा करने वाले तक दावेदार हैं। जेवर सीट पर वर्तमान भाजपा विधायक धीरेंद्र सिंह यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निकट माने जाते हैं। परंतु टिकट को लेकर उन्हें भी बहुत भरोसा नहीं है, ऐसा माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसी कारण वर्तमान विधायक और संभावित अन्य प्रत्याशी दूसरे दलों से भी निरंतर संपर्क बढ़ा रहे हैं। भाजपा के बाद समाजवादी पार्टी से भी अधिक मांग रालोद के टिकट की बताई जाती है। इसका कारण रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन में होना है और आगामी चुनाव में भी यह गठबंधन रहना लगभग तय है।ऐसी कई सीटें होंगी जहां रालोद के टिकट पर भाजपा उम्मीदवार दिखाई देंगे। चुनाव जीतने की गारंटी प्रत्याशियों में राजनीतिक दलों के टिकट का आकर्षण बढा देती है। चूंकि रालोद को गिनी चुनी सीटें मिलेंगी जिनमें से कुछ सीटों पर पार्टी के वफादारों को भी टिकट देने की अनिवार्यता होगी, लिहाजा मौजूदा विधायक और संभावित प्रत्याशियों द्वारा सपा नेताओं से भी नजदीकियां बढ़ाई जा रही हैं।ऐसी कई बैठकों की जानकारी मिल रही है जिनमें परस्पर विरोधी दलों के नेता मिले हैं। धनपतियों और हाई लेवल पहुंच का दावा करने वाले लोगों का अलग खेल चल रहा है। बगैर पार्टी सदस्यता ग्रहण किए टिकट के सबसे बड़े दावेदार होने के दावे हैं तो कुछ लोग सांसदी छोड़कर विधायक का टिकट हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

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