राजेश बैरागी।तीन वर्ष पहले आज ही के दिन प्रशासनिक कार्य से मैं कानपुर में था।अगली सुबह संबंधित सरकारी कार्यालय में उपस्थित होना था। लिहाजा रात्रि विश्राम के लिए एक अदद् ठिकाने की तलाश थी। गूगल से पूछा तो उसने ढेर सारे ओयो होटल के नाम पते सहित पेश कर दिए परंतु जहां भी संपर्क किया निराशा ही हाथ लगी। थक-हारकर एक ओयो होटल में ठहरने की व्यवस्था हुई। आस-पड़ोस के कमरे कम आयु के युवक युवतियों से भरे हुए थे। वेलेंटाइन डे का भारतीय उत्सव ओयो होटलों में ही अधिक मनाया जाता है। दैहिक आकर्षण प्रेम का प्रथम सोपान हो सकता है। हृदय से उत्पन्न होने वाले प्रेम को व्यक्त करने के लिए भी एकांत की आवश्यकता होती है।ओयो होटल इस प्रयोजन के उपयुक्त स्थान हो सकते हैं परंतु हैं नहीं। मेरी ओयो होटल को लेकर कोई दुर्भावना नहीं है। अच्छे उपकरण गलत उद्देश्य के लिए उपयोग हों तो उपकरण का क्या दोष? बात स्थान को लेकर है, वेलेंटाइन को लेकर है और कम आयु के युवक युवतियों के बीच पनपने वाले क्षणिक दैहिक आकर्षण को लेकर है। सांता क्लॉज और वेलेंटाइन नामक तथाकथित संतों के नाम पर स्थापित विदेशी उत्सवों के मनाये जाने का समय रात्रि है। इस रात्रि के प्रेमी जोड़े सुबह तक ठहर पायें,यह कहना जरा मुश्किल होता है।रात के बाद भी जमे रहने वाले प्रेमियों को वेलेंटाइन डे की क्या आवश्यकता है। वेलेंटाइन डे पर जोश,जमीर न्यौछावर करने वाले जोड़ों को प्रेमी क्यों कहा जाना चाहिए। मैं देख रहा हूं कि ओयो होटल वालों की आंखों में आज रात बढ़ने के साथ चमक भी बढ़ती जा रही है।
वेलेंटाइन: फूल कांटों में खिला था सेज पर मुर्झा गया










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