ग्रेटर नोएडा में टोकन दर पर आवंटित भूमि पर शारदा केयर का संचालन

राजेश बैरागी।क्या ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-2 स्थित शारदा यूनिवर्सिटी परिसर में शुरू किया गया शारदा केयर नाम से सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बिना नफे-नुकसान के संस्थान चलाने के नियम के अनुसार संचालित किया जा रहा है? देश का सर्वोच्च न्यायालय जहां नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के ऐसे ही मामले की पड़ताल कर रहा है वहीं मद्रास हाईकोर्ट ने तो तमिलनाडु राज्य औद्योगिक विकास निगम बनाम कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड मामले में पट्टा धारक के विरुद्ध निर्णय सुनाया है।
सरकार के प्राधिकरणों अथवा निगमों से नाममात्र मूल्य पर भूमि लेकर मोटी कमाई का प्रबंध करना कोई नई बात नहीं है।जो मामला प्रकाश में आ जाता है या कभी कभार कोई ईमानदार अधिकारी नियम कानून से काम करने लगता है तो ऐसे लोग पकड़ में आ जाते हैं, अन्यथा आम नागरिकों के संसाधनों का पूंजीपतियों द्वारा निजी हित में उपभोग चलता रहता है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा विकसित नॉलेज पार्क-2 में शारदा मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित भूमि पर चुपके से पंचतारा हॉस्पिटल शारदा केयर के नाम से संचालित कर दिया गया है। इस भूमि को आवंटन की शर्तों में स्वयं शारदा संस्थान के ट्रस्टीज द्वारा लिखकर दिया गया है कि यह मेडिकल कॉलेज बिना नफे-नुकसान के संचालित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता के लिए पहले से ही यहां एक अस्पताल चलाया ही जा रहा था। फिर शारदा केयर क्या है? दरअसल यह पूंजीपतियों द्वारा दान के पर्दे के पीछे से धन कमाने का तरीका है। पुराने अस्पताल और शारदा केयर की आपातकालीन सुविधा एक कर दी गई है।रोगी को सबसे पहले यहीं आना होता है। यहां से उसे सीधे शारदा केयर में धकेल दिया जाता है जहां उपचार कराने के लिए अन्य पंचतारा हॉस्पिटलों के समान खर्च लगता है। सुप्रीम कोर्ट आयेशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में एमिटी यूनिवर्सिटी के बिना नफे-नुकसान स्वरूप की गंभीरता से पड़ताल कर रहा है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु राज्य औद्योगिक विकास निगम बनाम कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड मामले में प्रतिवादी के विरुद्ध निर्णय सुनाया है। दरअसल निगम ने कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड को 17.64 एकड़ भूमि एक रुपए प्रतिवर्ष लीज पर 99 वर्ष के लिए आवंटित की है। यह भूमि वेयरहाउसिंग तथा लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित करने के लिए आवंटित की गई थी। परंतु कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड ने इस भूमि के कई टुकड़े बनाकर विभिन्न लोगों को सब-लीज कर दी और भारी किराया वसूलने लगा। केवल एक उप पट्टा धारक से मात्र 93718 वर्ग फुट क्षेत्र के लिए ₹1241764/- प्रतिमाह वसूले जाने का मामला सामने आया। मद्रास हाईकोर्ट ने इसे नियम विरुद्ध मानते हुए निगम को कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड से निगम के नियमानुसार किराया वसूलने का अधिकार प्रदान किया है। हालांकि शारदा केयर के मामले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा ऐसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है।(

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