राजेश बैरागी।क्या इंजीनियर युवराज की मौत को एक महीने में पूरी तरह भुला दिया गया है?उस घटना को लेकर मचे हो हल्ले के बाद एस आई टी जांच का कहीं अता-पता नहीं चलना और किसी भी जिम्मेदार के विरुद्ध कोई कार्रवाई न होने का असर यह हुआ है कि आज जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में प्राधिकरणों और कमिश्नरेट पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी शामिल होने नहीं पहुंचा और न पिछले महीने बैठक में सांसद डॉ महेश शर्मा द्वारा दिए गए निर्देशों पर ही कोई अमल किया गया।
नोएडा के सेक्टर 150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी के भूखंड में भरे पानी में कार सहित डूबने से इंजीनियर युवराज की मौत को आज एक महीना पूरा हो गया। बीते एक महीने में इस घटना की सुर्खी धुंधला दी गई है। सबकुछ वापस पुराने ढर्रे पर लौट आया है। प्राधिकरण अपने परंपरागत तौर तरीके से काम करने लगे हैं। शासन ने कुछ अभियंताओं के प्रतीक्षित तबादले कर दिए हैं तो नोएडा प्राधिकरण ने अपने यहां ट्रैफिक सेल और स्वास्थ्य विभाग को समाप्त कर वर्क सर्किलों को ही साफ-सफाई और सड़क सुरक्षा भी सौंप दी है।उस घटना को ठीक एक महीना पूरा होने के दिन आज मंगलवार को जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अपनी जिम्मेदारी के तहत जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई थी। इस समिति में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों तथा कमिश्नरेट पुलिस के उपायुक्त स्तर के अधिकारी सदस्य होते हैं।इन सभी अधिकारियों को बाकायदा बैठक की सूचना भेजकर आमंत्रित किया जाता है। परंतु आज की बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव और कमिश्नरेट पुलिस से सहायक पुलिस आयुक्त यातायात शकील अहमद ही उपस्थित हुए। अधिकारियों की अनुपस्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराज़गी भी व्यक्त की।बैठक में वर्ष 2025 तक जनपद में चिन्हित 152 क्रिटिकल क्रैश प्रोन लोकेशन्स तथा 35 सड़क दुर्घटना ब्लैक स्पॉट्स की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप सभी ब्लैक स्पॉट्स पर आवश्यक सड़क अभियान्त्रिकी उपाय जैसे स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक, डायरेक्शन बोर्ड, ट्रैफिक सिग्नल एवं सीसीटीवी कैमरे समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से स्थापित किए जाएं
युवराज की मौत के एक महीने बाद:जिला सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हुए पुलिस और प्राधिकरणों के बड़े अधिकारी











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