राजेश बैरागी।नोएडा प्राधिकरण में आदिकाल से चले आ रहे स्वास्थ्य विभाग को अचानक समाप्त कर समूचे नोएडा की सफाई व्यवस्था दस वर्क सर्किलों में बांटने का निर्णय क्यों लिया गया है? क्या इस निर्णय के पीछे नगर की सफाई व्यवस्था को और बेहतर करने की कोई छिपी योजना है या कुछ अधिकारियों द्वारा निजी हितों के लिए शीर्ष अधिकारियों को गुमराह कर यह अजीबोगरीब व्यवस्था लागू करा ली गई है?
नोएडा प्राधिकरण में लगभग स्थापना के समय से चले आ रहे स्वास्थ्य विभाग को अचानक समाप्त कर दिया गया है। कभी जब इस शहर की आबादी बहुत नहीं थी,उस समय सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने वाले चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में यह विभाग शहर की साफ-सफाई से लेकर शहरवासियों के जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र तक जारी करता था। नब्बे के दशक में डॉ अशोक मिश्रा ने लंबे समय तक इस विभाग का नेतृत्व किया। प्राधिकरण के अन्य विभागों की भांति यह विभाग भी भ्रष्टाचार से परे नहीं है बल्कि इस विभाग में नियुक्ति पाने के लिए और पद पर जमे रहने के लिए सभी हथकंडे आजमाए जाते रहे हैं। इस विभाग की शक्ति लगभग पांच हजार वे सफाईकर्मी हैं जो शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नियुक्त रहते हैं। उनमें से अधिकांश ठेकेदारों द्वारा उपलब्ध कराए गए कर्मचारी हैं जिनसे प्राधिकरण का सीधा नियोक्ता का संबंध तो नहीं होता है परंतु ठेकेदार केवल एक कानूनी व्यक्तित्व होता है।काम करना और कराना सीधे सीधे प्राधिकरण और सफाईकर्मियों के बीच का मामला है। आबादी बढ़ने के साथ स्वास्थ्य विभाग के दो डिविजन बनाकर पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को दो हिस्सों में बांट कर रखा गया था। ग्यारह हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयों, लाखों घरों, मॉल्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सड़क, चौराहों, मेट्रो स्टेशन तक प्रतिदिन उत्पन्न होने वाली गंदगी को साफ करने वाले पांच हजार कर्मचारियों को साधने की व्यवस्था समाप्त कर सिविल वर्क सर्किलों में बांट देने से क्या बेहतर हासिल होने वाला है, यह तो प्राधिकरण का शीर्ष नेतृत्व ही जानता होगा जिसने यह निर्णय लिया है परंतु यह भी सच्चाई है कि अपने जिम्मे के कामों को ठीक से पूरा नहीं कर पाने वाले वर्क सर्किल पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को कैसे संभालेंगे, यह देखना दिलचस्प हो सकता है। हालांकि सफाईकर्मियों के संगठनों ने इस नई व्यवस्था के विरुद्ध बगावत का बिगुल फूंक दिया है। आने वाले दिनों में सफाईकर्मियों द्वारा हड़ताल की जा सकती है। यहां एक बात बता देना प्रासंगिक है। लगभग डेढ़ दशक पहले प्राधिकरण ने इसी प्रकार प्रवर्तन विभाग को समाप्त कर वर्क सर्किलों को शहर में अतिक्रमण न होने देने की जिम्मेदारी दी थी। परिणाम सामने है। कोई भी वर्क सर्किल अतिक्रमण रोकने में सफल नहीं रहा है। बल्कि इसके उलट वर्क सर्किलों के ऊपर से नीचे तक के अधिकारी कर्मचारी अतिक्रमण और अवैध कब्जा कराने के ठेकेदार बन गए। वर्क सर्किल -6 के जिस वरिष्ठ प्रबंधक विश्वास त्यागी के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, उनपर सेक्टर 78-79 में स्पोर्ट्स सिटी की भूमि पर बहुमंजिले फ्लैट बनवाने का आरोप है।
नोएडा प्राधिकरण:आदिकाल से चली आ रही सफाई व्यवस्था को अचानक बदलने का फैसला लेना पड़ सकता है वापस!










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