
_-राजेश बैरागी-_
छिजारसी चोटपुर में हजारों घरों के बिजली कनेक्शन काटने की कहानी कैसी है?इन घरों में रहने वाले लाखों लोग अपने मूल गांव घर से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली जैसे महानगरों में रोजी-रोटी कमाने आए थे और अनजाने में ही इन महानगरों को बसाने में लग गए। महानगर बसने के बाद इन लोगों को वापस अपने मूल गांव या घरों को लौट जाना चाहिए था परंतु रोजी-रोटी की जंग जारी थी। उधर महानगरों को बसने के बाद चलने और चलते रहने के लिए इन लोगों की जरूरत थी। यहां एक प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि वैध और अवैध कॉलोनियों का वास्तविक अंतर क्या होता है? क्या गरीब या कम पूंजी रखने वाले लोगों द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुसार बसाई जाने वाली कॉलोनी अवैध कहलाती है और सरकारी निकायों द्वारा अमीरों के लिए बसाई जाने वाली कॉलोनी वैध होती है? इन प्रश्नों को कुछ देर के लिए अनुत्तरित छोड़कर वापस छिजारसी चोटपुर में हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बसे कॉलोनियों के समूह में चलते हैं। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या -9 से दृष्टि की सीमा के परे तक ठीक सामने उत्कृष्ट क्षेत्र नोएडा में एक अदद् मकान खरीदने में असमर्थ मनुष्यों की आबादी दिखाई पड़ती है। हिंडन थोड़ा अकड़ कर चलती है तो इन मनुष्यों के पैरों तले की जमीन हिलने लगती है।मैंने पहाड़ों पर भ्रमण के दौरान अनेक बार वहां ऊंचाई पर, आवश्यक संसाधनों के अभाव में रहने वाले लोगों से वहां रहने की विवशता जानने का प्रयास किया। अधिकांश लोगों ने बताया कि वे अपनी जन्मभूमि से प्यार करते हैं।छिजारसी चोटपुर में रहने वाले अधिकांश लोगों की यह विवशता नहीं है। अनियोजित और अविकसित कॉलोनियों में किसी क्षण भी नदी की बाढ़ के संकट के साये में जीने वाले लोग अपनी और अपने बाल बच्चों के पेट की भूख के समक्ष असहाय हैं। उन्होंने अपने घरों को सरकार के कार्यालय में पंजीकृत कराया है। उन्हें सरकार का मुफ्त राशन, चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी हासिल हैं। उनका मकान किसी न किसी थाना क्षेत्र में शामिल है। फिर वहां बिजली कनेक्शन क्यों काटे गए? क्या सरकार उन्हें आधा वैध और आधा अवैध मानती है? क्षमा करें वैध कॉलोनियों बसाने का अधिकार तो केवल सरकारी निकायों का विशेषाधिकार है। तो क्या इन लोगों को घुसपैठिया माना जाना उचित होगा? प्रश्न बहुत हैं जिनका कोई जवाब सरकार और उसके विभागों या निकायों के पास नहीं है। मालूम हुआ है कि इससे पहले कोई विपक्षी राजनीतिक दल सरकार के यहां बिजली कनेक्शन काटने के निर्णय को चुनौती दे, उससे पहले ही नोएडा विधायक पंकज सिंह और क्षेत्रीय सांसद डॉ महेश शर्मा ने इस मामले का संज्ञान ले लिया है।सब जानते हैं कि नोएडा समेत सभी महानगरों के भीतर और बाहर बसी ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले लोग केवल मतदाता ही नहीं हैं बल्कि महानगरों की गाड़ी को चलाने वाले भी यही लोग हैं। यहां एक बात और?ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया है कि जब भी शाहबेरी गांव में अवैध रूप से बनी बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जाती है तो बहुत से अधिकारी और नेताओं के ऐसे फोन आते हैं,-‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बिल्डिंग पर जाने की।'(नेक दृष्टि)
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