*ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण नोएडा और यीडा के मुकाबले महंगी खरीदेगा भूमि,6415 रुपए की मुआवजा दर, छः प्रतिशत भूखंड का विकल्प भी मिलेगा*

_-राजेश बैरागी-_

लगभग 12 वर्षों से भूमि मुआवजा दर पर अटके ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आज एक ही बार में साढ़े पचपन प्रतिशत की वृद्धि करते हुए मुआवजा दर 6415 रुपए प्रति वर्गमीटर लागू कर दी। इसमें से 690 रुपए कम दर पर मुआवजा देने वाले किसानों को प्राधिकरण छः प्रतिशत विकसित भूखंड का विकल्प भी देगा। यह भूखंड किसानों के लिए समर्पित आवासीय सेक्टर में उपलब्ध कराएगा। पिछले वर्षों में किसानों के आबादी आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने में नाकाम रहने से बिगड़ी साख को सुधारने के उद्देश्य से अब किसानों से भूमि क्रय करने के समय ही उन्हें छः प्रतिशत भूखंड का आरक्षण पत्र भी जारी किया जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी की पहल पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने बाई सर्कुलर के जरिए वर्षों से अटकी भूमि मुआवजा दर बढ़ाने को अनुमति दे दी है। वर्तमान मुआवजा दर 4125 रुपए में 2290 रुपए की अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए नयी मुआवजा दर 6415 रुपए प्रति वर्गमीटर लागू की गई है। छः प्रतिशत भूखंड लेने वाले किसानों को मुआवजा 5725 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से मिलेगा। यह मुआवजा दर पड़ोसी नोएडा और यमुना प्राधिकरणों से अधिक है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने प्राधिकरण और भूमि प्रदाता किसानों के बीच विश्वास का संबंध स्थापित करने के लिए भूमि क्रय करने के साथ किसानों को छः प्रतिशत भूखंड का आरक्षण पत्र जारी करने का भी निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा ही नहीं, नोएडा और यमुना प्राधिकरणों में भी एक डेढ़ दशक पहले भूमि दे चुके किसानों को आबादी आवासीय भूखंड हासिल करने के लिए आज भी चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे प्राधिकरणों और किसानों के बीच अविश्वास का माहौल बना हुआ है।इसी अविश्वास के चलते अकेले गौतमबुद्धनगर जनपद में लगभग अस्सी किसान संगठन बन गये हैं जो आये दिन प्राधिकरणों पर धरना प्रदर्शन आयोजित करते रहते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की इस पहल से संभव है कि प्राधिकरण और किसानों के बीच एक बार फिर विश्वास बहाली हो सकती है।अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने इस अवसर पर कहा,-इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को केवल भूमि का मूल्य देना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रेटर नोएडा के विकास और भविष्य की आर्थिक समृद्धि में सहभागी बनाना है।(नेक दृष्टि)

(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *