_-राजेश बैरागी-_
उत्तर प्रदेश में इस समय सत्ता शक्ति का केंद्र कौन सा नगर है? निस्संदेह किसी भी राज्य की राजधानी उस राज्य की शक्ति का केंद्र होती है परंतु उत्तर प्रदेश का गोरखपुर नगर लखनऊ के बाद इस राज्य का दूसरा और किन्हीं मायनों में पहला नगर है जो सत्ता शक्ति का केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी नगर के सदर विधायक हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले एक लंबे समय तक वे गोरखपुर के सांसद रहे। योगी आदित्यनाथ यहां गोरक्षपीठ के महंत भी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद भी गोरखनाथ मंदिर या गोरक्षपीठ से पूरी निकटता बनाए रखी है और अमूमन प्रत्येक सप्ताहांत में उनका यहां प्रवास होता है। समूचे उत्तर प्रदेश में उनके निरंतर दौरे होते हैं परन्तु अधिकांश जनता दर्शन कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर में ही होता है। इसलिए उनसे मिलने के लिए छोटे बड़े लोग लखनऊ के स्थान पर गोरखपुर को अधिमान देते हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन की उपेक्षा और अकर्मण्यता के शिकार राज्य के नागरिक हर जिले में हैं।एक मित्र के आग्रह पर मैं गोरखपुर यात्रा पर पहुंचा तो गोरखनाथ मंदिर के भ्रमण की अनिवार्यता तो थी ही।मठ, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च के प्रति मेरी श्रद्धा एक समान है और मैं उन्हें उनके अनुयायियों के शक्ति केंद्र के रूप में ही देखता हूं। गोरक्षपीठ भी एक शक्ति केंद्र ही है। इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि इसमें देवी-देवताओं के साथ भारत के अनेक महापुरुषों की मूर्तियां भी स्थापित हैं, मसलन महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी की मूर्तियां भी देवी-देवताओं की मूर्तियों के बराबर उसी सम्मान के साथ लगी हैं। यह मंदिर एक विशाल प्रांगण में है। यह बताने की यहां आवश्यकता नहीं है कि महंत योगी आदित्यनाथ की सदारत वाले इस मंदिर में साफ-सफाई, सुरक्षा, हरियाली की कोई कमी नहीं है। यह मंदिर का महात्म्य ही है कि बहुत से पुलिसकर्मी सिफारिश लगाकर और थानों की कमाई वाली नियुक्ति छोड़कर यहां की सुरक्षा संभालते हैं। गोरखपुर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था नहीं है परंतु यहां नागरिक सुरक्षा को लेकर कोई संकट नहीं है जबकि इस जनपद में भी एक अदद् औद्योगिक विकास प्राधिकरण गीडा कार्यरत है और यहां भी औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।(नेक दृष्टि)
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