
_-राजेश बैरागी-_
नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठकों का एजेंडा भूमि खरीदने पर केंद्रित हो सकता है। बीते सप्ताह की शुरुआत में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों के मुख्य कार्यपालक तीन दिन तक लखनऊ में डटे रहे। हालांकि उन्होंने लौटकर कुछ नहीं बताया परंतु कयास लगाए जा रहे हैं कि नोएडा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों के लिए वर्तमान प्रचलित मुआवजा दरों पर भूमि हासिल करना संभव नहीं है।इन दोनों प्राधिकरणों को मुआवजा दर बढ़ाने में कोई गुरेज भी नहीं है परंतु यमुना प्राधिकरण इनकी राह में रोड़ा बन गया है।तथाकथित किसान संगठनों की अति सक्रियता और क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के बढ़ते धंधे से नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को भूमि जुटाने में भारी समस्या पैदा हो गई है। नोएडा प्राधिकरण न्यू नोएडा के लिए और ग्रेटर नोएडा फेज एक और दो के लिए मौजूदा मुआवजा दर पर जमीन खरीदने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। विदेशों से निवेश आमंत्रित करने के बावजूद भूमि उपलब्ध न करा पाने से प्राधिकरणों को फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।माना जा रहा है कि आगामी बोर्ड बैठकों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण मुआवजा दर बढ़ाने पर कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। दूसरी ओर किसानों की लीज बैक और किसान आबादी भूखंडों के लंबित आवंटन के बीच धनिक लोगों की भूमि को अधिग्रहण से मुक्त करने की साजिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। अधिग्रहण के बीच आ रही भूमि पर पहले नोटिस देकर और फिर नोटिस निरस्त करने का खेल जोरों पर चल रहा है।मूल किसान अपनी आबादी को जायज ठहराने के लिए मारा मारा फिर रहा है और धनिक लोग घर बैठे पैसा फेंककर तमाशा देख रहे हैं।(नेक दृष्टि)
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