
_-राजेश बैरागी-_
चार महीने पांच दिन पहले गत 28 मार्च को दादरी (गौतमबुद्धनगर) स्थित मिहिरभोज कॉलेज के मैदान में भारी भीड़ जमा हुई थी। आयोजकों का दावा था कि 15 से बीस हजार लोग उस दिन वहां जुटे थे। हालांकि भीड़ के लिए आयोजक के कहने पर खाने का प्रबंध करने वाले शख्स ने बताया था कि उसने दस हजार पैकेट खाना पैक कराया था। वह रैली सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए आयोजित की गई थी।तब गर्मी की शुरुआत हो चुकी थी फिर भी लोग पंडाल में खचाखच भरे हुए थे। दादरी के मुकाबले दूसरे जनपदों से अधिक लोग आए थे। जीटी रोड पर जाम जैसी दशा थी। हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी रैलीस्थल से लेकर दादरी के गाजियाबाद छोर से सिकंदराबाद छोर तक स्थिति को नियंत्रित करने में लगे थे। आज वहां से लगभग पन्द्रह सौ मीटर दूर एक निजी कॉलेज के मैदान पर भाजपा की रैली हुई। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस रैली का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनाव अभियान को लेकर विशेष महत्व है। रैली में मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी थे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का उत्तर प्रदेश के संदर्भ में स्तर एकसमान ही है। अनुमान है कि आज भाजपा की रैली में लगभग बीस हजार लोग आए। सभा स्थल जीटी रोड पर होने से जाम जैसे हालात आज भी बने। वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोई दो सौ पुलिसकर्मियों ने व्यवस्था संभाली।सपा की रैली में भाजपा और योगी मोदी से नफ़रत की हद तक नाराज़ लोगों की संख्या बहुत अधिक थी। उन्हें संभवतः अखिलेश यादव में अपने भविष्य की मुक्ति का मसीहा दिखाई देता है।उस रैली में सड़क पर पैदल और वाहनों से आ रहे लोगों में टकराने जैसी भावना दिखाई देती थी। संभवतः इसीलिए अधिक पुलिसकर्मी लगाए गए थे। आज सत्तारूढ़ पार्टी की रैली थी। उसमें आने वाले लोगों से किसी उत्पात की आशंका नहीं थी। इसलिए पुलिस कम थी और आराम से थी। सपा की रैली में उत्तेजना बहुत थी। आज भाजपा की रैली में स्थानीय नेताओं के बीच अपनी लोकप्रियता को प्रदर्शित करने की प्रतिस्पर्धा तो खूब दिखाई दी परंतु रैली में आए लोगों में कोई उत्तेजना नहीं थी। आयोजकों ने सभास्थल को बखूबी व्यवस्थित किया था।लोग अपने स्थानीय नेताओं को देखने सुनने आए थे। इसलिए मुख्य अतिथि का भाषण शुरू होते ही अधिकांश लोग उठकर जाने लगे। एक महत्वपूर्ण बात और, दोनों ही रैलियों का उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर बिरादरी को अपने पक्ष में साधने का था। आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम बताएंगे कि सपा और भाजपा में से कौन इस मिशन में सफल हो पाया।(नेक दृष्टि)
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