ग्रेटर नोएडा कलाधाम आवासीय सोसायटी में मासूम बच्चे की डूबने से मौत *यह घटना दुखद् परंतु क्या केवल प्राधिकरण ही है जिम्मेदार

_-राजेश बैरागी-_

हादसे की शक्ल, स्थान और समय कोई तय नहीं कर सकता है परंतु कुछ हादसे मानव निर्मित होने का आभास देते हैं। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-2 स्थित कलाधाम आवासीय सोसायटी में कल शनिवार की शाम एक छ: वर्षीय बच्चे अव्यान की एक गड्ढे में डूबने से हुई दुखद् मौत से कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। मसलन लाखों या करोड़ों रुपए के काम की जिम्मेदारी लेने वाले ठेकेदार मामूली से सुरक्षा बंदोबस्त पर कंजूसी क्यों करते हैं?कलाधाम सोसायटी में यह गड्ढा जलापूर्ति के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा ठेकेदार के माध्यम से कराए जा रहे बोरिंग के लिए खोदा गया था। पार्किंग स्थल में खोदे गए इस गहरे गड्ढे के आसपास जाने से रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हालांकि यह खेलने का स्थान नहीं है परंतु सौ मीटर दूरी पर रहने वाला अव्यान अपने साथी बच्चे के साथ यहां खेल रहा था और पैर फिसलने से गड्ढे में जा गिरा।जब तक उसे निकाला गया, उसकी जीवन डोर टूट चुकी थी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी सहित सभी अधिकारियों ने न केवल इस घटना पर गहरा दुख जताया है बल्कि ठेकेदार को काली सूची में डालने, उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने, दो फील्ड कर्मचारियों को बर्खास्त करने और दुर्घटना की विभागीय जांच जैसे कड़े कदम भी उठाए हैं। हालांकि इस सब से अव्यान को वापस नहीं लाया जा सकता है। परंतु इस दुर्घटना के लिए कुछ और कारण भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।आज दोपहर घटनास्थल का भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि वहां लगभग दो मंजिला ऊंची बोरिंग मशीन लगी हुई है। वहां पिछले कई दिनों से काम चल रहा था। ऐसे स्थान पर जाने से बच्चों को रोका जाना चाहिए था।कलाधाम सोसायटी में बाकायदा आरडब्ल्यूए भी है। उसके पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें यहां बोरिंग का काम चलने की जानकारी नहीं थी। क्या एक चारदीवारी वाली सोसायटी में इतना बड़ा काम आरडब्ल्यूए की बगैर जानकारी के किया जा सकता है।हमें अंदर जाने देने के लिए सोसायटी के गेट पर सुरक्षा गार्ड ने पूरी जानकारी ली। क्या बोरिंग के लिए सोसायटी के अंदर आई भारी मशीनरी, श्रमिक और गड्ढा खोदे जाने की जानकारी सुरक्षा गार्डों ने आरडब्ल्यूए को नहीं दी होगी? यदि ऐसा है तो फिर आरडब्ल्यूए के होने और न होने का क्या अंतर? आरडब्ल्यूए को सोसायटी में बोरिंग होने की जानकारी निवासियों के साथ साझा करना चाहिए थी और कार्यस्थल की सुरक्षा का जायजा भी लेना चाहिए था। निस्संदेह प्राधिकरण और ठेकेदा इस दुखद् घटना के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं परन्तु सोसायटी की आरडब्ल्यूए तथा निवासियों को भी अपनी जिम्मेदारी और सामान्य जागरूकता न रखने की गलती से छूट नहीं दी जा सकती है। एक महत्वपूर्ण बात और, इस आधुनिक सुविधाओं से युक्त सोसायटी की आंतरिक सड़कें इतनी संकरी हैं कि किसी भी विषम परिस्थिति में फायर ब्रिगेड जैसी एजेंसी को अंदर पहुंचना मुश्किल हो सकता है।(नेक दृष्टि)

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