_-राजेश बैरागी-_
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्धनगर ने गत 14 मार्च को एक अधिवक्ता फरीद अहमद को घर से उठाकर बिसरख थाना ले जाने और मारपीट करने के मामले में थाना बिसरख में ही एक दरोगा और अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।अधिवक्ता फरीद अहमद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ह्रषिकेष त्रिपाठी की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत याचिका दायर कर पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के थाना बिसरख पर तैनात दरोगा ऋषिपाल सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई थी। अधिवक्ता के अनुसार गत 14 मार्च को थाना फेज दो अन्तर्गत गांव ककराला स्थित उसके घर पर रात्रि में दरोगा ऋषिपाल सिंह व अन्य कुछ पुलिसकर्मी पहुंचे। उन्होंने दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश किया और अधिवक्ता व उसकी पत्नी के साथ मारपीट करने के बाद उन्हें अपने साथ जबरन थाना बिसरख ले गए। वहां भी उसके साथ निर्दयतापूर्वक मारपीट की गई। अपने साथ हुई इस घटना के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अधिवक्ता ने पुलिस आयुक्त को प्रार्थना पत्र दिया था। वहां से कोई कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने अदालत की शरण ली। अधिवक्ता अमित राणा ने बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,- सभ्य समाज में पुलिस को किसी भी व्यक्ति,वह चाहे अपराधी ही क्यों न हो, उसके साथ मारपीट करने का अधिकार नहीं है।’ उल्लेखनीय है कि उस समय यह घटना काफी चर्चित रही थी। अधिवक्ता को हिरासत में लेने पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने थाने पहुंचकर हस्तक्षेप किया था।(नेक दृष्टि)
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