नोएडा में एक और इंजीनियर के डूबने का मामला हादसों के शहर में जिम्मेदारी न लेने की होड़

_-राजेश बैरागी-_

क्या ग़लती न मानने से गलती दूर हो सकती है या हो चुके नुक्सान की भरपाई हो सकती है? नोएडा सेक्टर 58 में जलभराव से बचने के फेर में नाले की पटरी पर चढ़ने वाले युवा इंजीनियर आर्यन की असमय मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? जिम्मेदारी के इस कोण पर आकर नोएडा प्राधिकरण और बिजली विभाग पल्ला झाड़ कर चल दिए हैं। घटनास्थल पर ट्रांसफार्मर से उतरे करंट ने आर्यन को नाले में ठेल दिया या नाले की टूटी स्लैब ने उसे नाले के भीतर जाने के लिए विवश कर दिया, यह पुलिस जांच का विषय बनकर रह गया है।जब तक पुलिस जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी,तब तक आर्यन की मौत को देर हो चुकी होगी।हो सकता है इतनी देर हो जाए कि यह याद भी न रहे कि कौन,कब और कहां……. गया था। नोएडा भी अन्य महानगरों की भांति हादसों का शहर बनता जा रहा है। यहां नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त रखने के लिए जो भी जिम्मेदार विभाग या संस्थान हैं, उनकी जिम्मेदारी संदेह के दायरे में है। दुर्घटना के बाद नाले की टूटी स्लैब बदल देना,करंट लगने के बाद बिजली उपकरणों को ठीक करना किसी व्यवस्थित संस्थान या विभाग के काम नहीं हैं। आर्यन की मौत की जिम्मेदारी अभी किसी ने नहीं ली है। छः महीने पहले नोएडा के सेक्टर 150 में एक पानी भरे भूखंड में डूबे युवराज की मौत की जिम्मेदारी भी किसी ने नहीं ली थी। आर्यन के मामले में बिजली विभाग अपने खंभों और ट्रांसफार्मर को बिना करंट का बता रहा है तो नोएडा प्राधिकरण नाले की गहराई को किसी के डूबने के अयोग्य ठहरा रहा है। ऐसा करने से क्या हासिल होता है? गलती मानने से गलती को सुधारा जा सकता है और भविष्य की किसी और दुर्घटना पर रोक लगाई जा सकती है। यदि गलती मानी ही न जाए तो?न गलती सुधार की आवश्यकता होती है और न भविष्य की चिंता।आर्यन की असमय मौत किसकी गैर जिम्मेदारी का परिणाम है, यह साबित करना शायद कभी भी संभव न हो परंतु क्या इतना संभव हो सकता है कि इस शहर में रोजी रोटी की तलाश में आने वाले लोगों को अपनी जीवनरेखा को अकारण मिटाने का अधिकार किसी को न हो।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *