_-राजेश बैरागी-_
आग की भयावहता कैसी होती है और गौतमबुद्धनगर जिले में कार्यरत तीनों प्राधिकरण, जो अपने अपने अधिसूचित क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं के भी ज़िम्मेदार हैं,अग्नि सुरक्षा को लेकर कितने गंभीर हैं?जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर श्रीमती मेधा रूपम ने बीती तीस जून को कलेक्ट्रेट सभागार में एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक कर जिले में अग्नि सुरक्षा मानकों के शत-प्रतिशत अनुपालन के आदेश दिए। यह बैठक गत 22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक दोमंजिला भवन में भीषण आग की चपेट में आकर 15 लोगों की दर्दनाक मौत और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समूचे राज्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने से रोकने के कड़े निर्देश को लेकर की गई थी। इस बैठक में यहां कार्यरत तीनों प्राधिकरणों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था परंतु केवल यीडा से एक प्रतिनिधि पहुंचा और वह भी प्रबंधक स्तर का। प्रबंधक स्तर का मतलब जूनियर इंजीनियर होता है।शेष दोनों प्राधिकरणों ने जिलाधिकारी की अग्नि सुरक्षा को लेकर बुलाई गई बैठक में उपस्थित होने की जहमत नहीं उठाई। बैठक के बाद क्या हुआ? गौतमबुद्धनगर एक ऐसा निराला जनपद है जहां नब्बे प्रतिशत क्षेत्र नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा जैसे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का अधिसूचित क्षेत्र है। यहां व्यवस्था से लेकर कार्रवाई तक तीनों प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है। यहां कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था है जिसपर जिलाधिकारी का कोई बस नहीं चलता।जिले का सर्वोच्च अधिकारी जिलाधिकारी होता है,यह संविधान और सरकारी किताबों की बातें हैं। लखनऊ के हृदयविदारक अग्निकांड के बाद सभी प्राधिकरणों, नगर निकायों ने अपने यहां मॉल, बाजारों और ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा उपायों की रस्मी खबर ली। कहीं हिदायत दी गई और कहीं नोटिस। प्राधिकरण के वर्क सर्किल -1 के वरिष्ठ प्रबंधक द्वारा जारी एक नोटिस पर गौर फरमाएं। यह नोटिस 23 जून को प्राधिकरण के ही संस्थागत विभाग को भेजा गया था। इसमें स्पष्ट लिखा है कि सेक्टर 11 नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल में बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर बेसमेंट में ओपीडी जैसी गतिविधियां चलाई जा रही हैं, पड़ोस के आवासीय भूखंड को भी अस्पताल में मिला लिया गया है तथा अस्पताल के बाहर बेतरतीब पार्किंग की जा रही है। क्या इस नोटिस पर कोई कार्रवाई की गई?इस प्रश्न का उत्तर नोएडा प्राधिकरण ही दे सकता है परंतु प्राधिकरण के नियोजन विभाग के अधिकारी मेट्रो हॉस्पिटल की इस अनियमितता की बात करने पर हमेशा सेक्टर 27 स्थित कैलाश हॉस्पिटल के बेसमेंट में चल रही ऐसी ही गतिविधियों की बातें करने लगते हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण भी इस प्रकार की कार्रवाई न करने में पीछे नहीं है। वेस्ट में स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के भूतल पर हॉस्पिटल की गतिविधियां बेशक दिखाई न दें परन्तु बेसमेंट में चिकित्सा का बाजार सजा हुआ है। ओपीडी से लेकर कैफेटेरिया तक सबकुछ बेसमेंट में मिलेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अस्पताल ने बेसमेंट में ऐसी गतिविधियों की अनुमति ले रखी है।जिलाधिकारी कहती हैं कि बेसमेंट केवल भंडारण और पार्किंग के लिए उपयोग हो सकता है। परंतु प्राधिकरणों के इस जिले में जिलाधिकारी की बात का क्या महत्व।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)
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