
_-राजेश बैरागी-_
धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर आप क्या सोचते हैं? यह प्रश्न साफ-सफाई या स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में नहीं है। श्रेष्ठ रामकथा वाचक विजय कौशल जी महाराज कहते हैं कि तीर्थ स्थलों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए परन्तु वहां अधिक दिनों तक रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि अधिक दिनों तक रुकने से तीर्थ स्थलों की गंदगी उजागर होने लगती है।यह भी कहा गया है कि रमता जोगी और बहता पानी ही स्वच्छ रह पाता है। क्या तीर्थ स्थलों में मठाधीश लोग वहां गंदगी फैलाने लगते हैं? क्या अयोध्या का राम मंदिर भी इसी प्रकार का तीर्थ स्थल है? अपने दुखों कष्टों से मुक्ति और सुख समृद्धि की मनौती मांगने के लिए आने वाले श्रद्धालु वहां रखे दान पात्रों में पैसा रुपया इसलिए नहीं डालते कि वह प्रभु श्रीराम की सांसारिक आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। तीर्थ स्थलों पर चढ़ावा इसलिए चढ़ाया जाता है कि उस स्थल का रखरखाव बदस्तूर चलता रहे। उसमें से चोरी करना कैसा कर्म है? मैं चंपतराय को बहुत नहीं जानता परन्तु मुझे हमेशा उनपर संदेह रहा है।वह अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सर्वेसर्वा हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्हें प्रधानमंत्री का विश्वास हासिल होने के कारण राम मंदिर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने और उनके साथियों ने क्या किया? वापस विजय कौशल जी महाराज की सलाह पर लौटते हैं। क्या वास्तव में तीर्थ स्थल ज्यादा देर तक ठहरने के स्थान नहीं होते हैं? वहां केवल धर्म-कर्म नहीं होते। वहां भी राम जी का प्रसाद समझकर मंदिर के दान को हजम कर लिया जाता है। वहां भी राम की प्रभुता से अलग अपना प्रभुत्व बनाए रखने की साजिशें रची जाती हैं। वहां रहकर भी माया के मोह से मुक्ति नहीं मिलती।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)
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