नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: कहानी सुनी अनसुनी (भाग -2)ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आमंत्रित की थीं हवाई अड्डे की टीईएफआर तथा डीपीआर तैयार करने की निविदाएं

राजेश बैरागी।उद्घाटन की देहरी पर खड़े नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना को लेकर सबसे पहले खतो किताबत (लिखा पढ़ी)तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भारत सरकार को पत्र लिखकर की थी।उस समय केंद्र में भाजपा नीत वाजपेई सरकार थी। इसके लिए डीपीआर आदि भी तैयार कराने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। परंतु यह सब कार्य यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने नहीं बल्कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा किया गया था।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना वर्तमान में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा पीपीटी मॉडल पर ज्यूरिख इंटरनेशनल कंपनी के माध्यम से कराई जा रही है। हवाई अड्डा यात्री एवं कार्गो विमान सेवाएं शुरू करने के लिए लगभग तैयार है।कयास लगाए जा रहे हैं कि इस महीने के अंत तक किसी भी दिन इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हाथों हो जाएगा। हालांकि अभी नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो से सुरक्षा संबंधी अंतिम प्रमाण पत्र जारी किया जाना शेष है। यहां तक पहुंचने के लिए इस हवाई अड्डे को पच्चीस वर्ष का समय लगा। हालांकि निर्माण की दृष्टि से देखें तो यह हवाई अड्डा देश में बने किसी भी हवाई अड्डे से कम समय में बनकर तैयार हुआ है। इस हवाई अड्डे के विचार की शुरुआत से लेकर अब तक कई कहानियां सुनी अनसुनी हैं।दरअसल 2001 में भारत सरकार को पत्र भेजने के बाद इसकी डीपीआर आदि तैयार करने के लिए कंपनी का चयन किया जाना था।यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण 24 अप्रैल 2001 को अस्तित्व में आ चुका था परंतु प्राधिकरण के कार्यालय आदि की व्यवस्थाएं सुचारू नहीं हो पाई थीं। लिहाजा हवाई अड्डे से संबंधित कार्यों का जिम्मा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सौंपा गया। एक पुराना पत्र देखकर यह मालूम हुआ कि सरकार के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हवाई अड्डे की टीईएफआर तथा डीपीआर तैयार करने के लिए इच्छुक कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की थीं।उस समय पांच कंपनियों ने निविदा प्रस्तुत की थीं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी द्वारा 21/8/2001 को एक पत्र उत्तर प्रदेश निर्यात निगम के महाप्रबंधक के माध्यम से सचिव औद्योगिक विकास उत्तर प्रदेश अनूप मिश्रा को इच्छुक कंपनियों का ब्यौरा भेजा गया था।उस पत्र में पांच कंपनियों का उल्लेख किया गया था जिनमें से एक कंपनी सिंगापुर की भी थी। हालांकि मुख्यमंत्री पद से राजनाथ सिंह के हट जाने से हवाई अड्डे की योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई थी। बाद में 2008 में मुख्यमंत्री मायावती और 2014 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेवर में हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा परंतु इस महत्वाकांक्षी परियोजना का ठोस प्रस्ताव योगी आदित्यनाथ ने 2017 में भेजा जो अब साकार होने जा रहा है।

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