राजेश बैरागी।मैं हमेशा यह सवाल पूछता हूं कि रसोई गैस के स्थानीय एजेंसी संचालकों के पास उनको आवंटित गैस सिलेंडरों को उपभोक्ता तक पहुंचाने के साधन कितने हैं? एक समय दादरी (गौतमबुद्धनगर) स्थित भारत गैस एजेंसी के संबंध में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी गई तो भारत पेट्रोलियम ने भी इस प्रकार की जानकारी होने से अनभिज्ञता जाहिर कर दी थी। क्या यह दुर्लभ या गोपनीय जानकारी है? दरअसल रसोई गैस सिलेंडर वितरित करने के साधनों में ही इस अतिआवश्यक ईंधन की कालाबाजारी का राज छिपा होता है।आम धारणा है और संभवतः यह सच भी है कि प्रत्येक रसोई गैस एजेंसी पर वास्तविक उपभोक्ताओं के मुकाबले कम से कम दोगुना कनेक्शन होते हैं। फर्जी कनेक्शन की बदौलत मिलने वाले गैस सिलेंडरों को ढोकर पहुंचाने की समस्या ही नहीं होती है। इसके उलट वैध कनेक्शन के आधे तिहाई सिलेंडर उपभोक्ताओं द्वारा एजेंसी या गोदाम से खुद प्राप्त किए जाते हैं। ऐसे में एजेंसी संचालक लगभग एक चौथाई सिलेंडर ढोने के लिए ही संसाधनों यथा कर्मचारियों तथा वाहनों की व्यवस्था करता है। यदि उसके यहां मौजूद कनेक्शन के अनुपात में ढुलाई व्यवस्था की जांच की जाए तो वास्तविकता खुद ब खुद सामने आ जाएगी। यह कोई राज या रहस्य नहीं है और इस व्यवस्था को जांचने का अधिकार रखने वाले सरकारी विभाग के अधिकारियों के लिए तो बिल्कुल नहीं है।
हाल ही में जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर मेधा रूपम ने गैस एजेंसी संचालकों के साथ बैठक कर गैस सिलेंडर आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के कड़े आदेश दिए थे। जिलाधिकारी ने प्रत्येक गैस एजेंसी को सीसीटीवी निगरानी में रखने के भी आदेश दिए थे। अमेरिका इजरायल बनाम ईरान युद्ध के दृष्टिगत आम नागरिकों को रसोई गैस की सामान्य आपूर्ति के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण हैं। हालांकि इसके बावजूद गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है। विशेषकर जनसंख्या घनत्व वाली अवैध कॉलोनियों में। दिलचस्प बात यह है कि कालाबाजारी करने वालों ने गैस सिलेंडरों की नियमित अंतराल पर बुकिंग करने की व्यवस्था को गैस आपूर्ति में पीछे से कटौती का रूप देकर बाजार में सनसनी फैला दी है
रसोई गैस सिलेंडर आपूर्ति और ढुलाई के साधनों में अंतर से है कालाबाजारी का सीधा संबंध











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