राजेश बैरागी।पिछले आठ वर्षों से लगभग मृतप्राय पड़ा सिकंद्राराऊ सीएचसी सेंटर एक बार फिर जनसेवा के लिए उठ खड़ा हुआ है। जिलाधिकारी अतुल वत्स की पहल पर दो करोड़ रुपए की लागत से इस सीएचसी सेंटर को ट्रॉमा सेंटर के तौर पर शुरू किया गया है और पहली इंप्लांट सर्जरी के तौर पर एक व्यक्ति के पैर से रॉड निकाली गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछड़े जिलों में शुमार हाथरस में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। यहां से गंभीर मामलों में चिकित्सा के लिए आगरा, मथुरा या दिल्ली जाना पड़ता है। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने पिछले वर्ष कार्यभार संभालने के बाद सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में जानकारी ली तो डराने वाले आंकड़े सामने आए।2025 में हाथरस जिले में कुल 512 सड़क सड़क दुर्घटनाएं रिपोर्ट हुईं।इन दुर्घटनाओं में 309 लोगों ने जान गंवाई। दुर्घटना में मृतकों की इतनी बड़ी संख्या के पीछे हाथरस जिले में सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में आवश्यक चिकित्सा सुविधा न होना एक बड़ा कारण सामने आया। आमतौर पर सड़क दुघर्टनाओं में गंभीर घायलों को आगरा, मथुरा या दिल्ली लेकर भागना पड़ता था जिसमें समय की बर्बादी से अधिकांश लोगों की जान चली जाती थी। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने लगभग आठ वर्षों में बंद पड़े सिकंद्राराऊ सीएचसी सेंटर को ट्रॉमा सेंटर में बदलने की पहल की।दो करोड़ रुपए की लागत से यहां ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हो गया है। एनेस्थीसियोलिस्ट की तैनाती से यहां गंभीर किस्म की सर्जरी भी संभव हो गई है।हाल ही में एक व्यक्ति के पैर से ढाई घंटे चले ऑपरेशन के बाद रॉड निकाली गई। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने बताया कि अब फ्रैक्चर और सड़क हादसे के घायलों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो गया है।
सिकंदराराऊ(हाथरस) में सीएचसी पर दो करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर शुरू, घायलों को तत्काल मिलेगी जीवनरक्षा मदद,दिल्ली आगरा के लिए दौड़ पर लगेगी रोक









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