राजेश बैरागी।क्या इंजीनियर युवराज की गैर इरादतन हत्या की साज़िश पिछले कई वर्षों से की जा रही थी? यह प्रश्न अजीब जरूर है परंतु अपने कल की पोस्ट में किए गए वादे के मुताबिक मैं यह बताने के लिए विवश हूं कि सेक्टर 150 नोएडा स्थित उस भूखंड संख्या एस सी 02/ए3 पर लगी बेरीकेडिंग को लगभग चार वर्ष पहले प्राधिकरण ने क्यों हटवा दिया था और न केवल हटवा दिया था बल्कि बेरीकेडिंग लगाने के जुर्म में बिल्डर पर छः लाख रुपए की पेनाल्टी भी लगाई गई थी। यह नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और शहर में विज्ञापन का धंधा करने वाले माफिया के नेक्सस की भ्रष्टाचार कथा है। मेरी आंखों के सामने 2022 में प्राधिकरण द्वारा जारी वह प्रेस विज्ञप्ति चमक रही है जिसमें सेक्टर 150 स्थित 13 बिल्डरों पर अपने प्रोजेक्ट परिसरों में अवैध रूप से यूनीपोल और होर्डिंग लगाकर विज्ञापन करने के आरोप में पेनाल्टी लगाने का ब्यौरा दिया गया था। इस विज्ञप्ति में सबसे ऊपर नाम इसी भूखंड के अर्थम बिल्डर का है।उस पर छः लाख रुपए अर्थ दंड लगाया गया है। जिस भूखंड में पानी भरे होने से युवराज की डूबकर मौत हुई वहां कहीं भी यूनीपोल और होर्डिंग लगाने की जगह नहीं है। दरअसल अर्थम बिल्डर ने अपने भूखंड पर सड़क की ओर लगभग 15 फीट ऊंची टिन की चादरों की बेरीकेडिंग लगाई हुई थी। उन्हीं चादरों पर अपने प्रोजेक्ट का नाम लिखा था। आगे की कथा सुनाने से पहले एक और प्रश्न उत्पन्न हो गया है। नोएडा जैसे महानगरों को वास्तव में कौन चलाता है? क्या पुलिस प्रशासन और स्थानीय निकाय यथा प्राधिकरण शहर की व्यवस्था चलाते हैं या अदृश्य रहने वाले माफिया इन शहरों को नियंत्रित करते हैं? दरअसल नोएडा ग्रेटर नोएडा में विज्ञापन माफिया पूरी तरह सक्रिय है।वैध अवैध यूनीपोल, होर्डिंग्स,फुट ओवर ब्रिज सभी पर उसका कब्जा रहता है। प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ नेक्सस से माफिया का कारोबार चलता है। मैंने कल की पोस्ट में लोटस ग्रीन स्पोर्ट्स सिटी के बिल्डर थ्री सी फेम निर्मल सिंह के वेतन भोगी कुछ लोगों को प्राधिकरण के विभिन्न विभागों में कार्यरत बताया था। प्राधिकरण के कई अधिकारी विज्ञापन माफिया के पेरोल पर काम करते हैं या उसके धंधे में सहभागी बने हुए हैं।उसी माफिया के इशारे और शिकायतों पर बिल्डर प्रोजेक्ट पर लगी बेरीकेडिंग को अवैध रूप से विज्ञापन करने का आरोप लगाकर प्राधिकरण के ये अधिकारी न केवल हटवा देते हैं बल्कि अर्थदंड भी आरोपित कर देते हैं। युवराज की तेज रफ्तार कार उस बेरीकेडिंग से टकराकर रुक जाती या नहीं, यह एक काल्पनिक प्रश्न हो सकता है परंतु कथित तौर पर अवैध रूप से विज्ञापन करने के आरोप में बेरीकेडिंग को हटवाने और पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई काल्पनिक बिल्कुल नहीं थी। बहरहाल गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने अर्थम बिल्डर के गिरफ्तार स्वामी कुंवर अभय सिंह की जमानत पर फैसला करने से पहले मुकदमे के विवेचक से उस भूखंड से बेरीकेडिंग हटवाने वाले अधिकारी के बारे में जानकारी मांग ली है।अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।उधर पुलिस अपराध शाखा ने अर्थम बिल्डर के 174बी, सेवेंथ फ्लोर कोरेंथम टावर सेक्टर 62 नोएडा स्थित कार्यालय को आज सील कर दिया है।
इंजीनियर युवराज का गैर इरादतन हत्या मामला:विज्ञापन माफिया और प्राधिकरण अधिकारियों के नेक्सस से वर्षों पहले ही रच दी गई थी साजिश









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