राजेश बैरागी।यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा आवंटित एक किसान आबादी आवासीय भूखण्ड के तथाकथित फर्जी ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी होने और उसके आधार पर भूखंड की ट्रांसफर लीज डीड होने का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में अदालत में एक मुकदमा विचाराधीन होने के बावजूद ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी होने से प्राधिकरण द्वारा जारी पहले टी एम भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
यह मामला यमुना प्राधिकरण के सेक्टर 25 स्थित भूखंड संख्या 49 का है। यह भूखंड मूंजखेड़ा गांव की अधिग्रहीत भूमि के बदले अहमद सईद को आवंटित किया गया था।अहमद सईद ने इस भूखंड को बेचने के लिए परवेज मौहम्मद से सौदा किया और उसके पक्ष में पंजीकृत एग्रीमेंट भी कर दिया परंतु उसके पक्ष में ट्रांसफर मेमोरेंडम जारी कराने में टाल-मटोल करता रहा। परवेज़ मौहम्मद ने उसकी नीयत खराब जानकर जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर में एक मुकदमा दायर कर उक्त भूखंड के क्रय विक्रय तथा हस्तांतरण पर यथास्थिति का आदेश प्राप्त कर लिया। यह आदेश समान रूप से प्राधिकरण पर भी लागू है। इस संबंध में प्राधिकरण के संबंधित तहसीलदार को भी सूचित कर दिया गया।2 दिसंबर 2024 के इस आदेश के आठ दिन बाद ही प्राधिकरण ने उक्त भूखंड को हस्तांतरित करने संबंधी ज्ञापन (टीएम) जारी कर दिया।उस हस्तांतरण ज्ञाप के आधार पर दो दिन बाद ही 12 दिसंबर 2024 को अहमद सईद ने किसी कनिष्क नामक व्यक्ति को भूखंड की ट्रांसफर डीड भी कर दी। परवेज मौहम्मद ने प्राधिकरण की इस कार्रवाई के विरुद्ध जिला न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। उधर प्राधिकरण द्वारा जारी अन्य टीएम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि प्राधिकरण में इस प्रकार फर्जी टीएम जारी करने वाला गिरोह सक्रिय है जिसमें प्राधिकरण के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। ये लोग फर्जी तरीके से टीएम जारी करने का काम करते हैं और मोटी रकम ऐंठते हैं। ऐसे फर्जी टीएम को प्राधिकरण के डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जाता है। उपरोक्त भूखंड के लिए जारी टीएम भी डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज नहीं है। इस टीएम पर अंकित पत्रांक डिस्पैच रजिस्टर में अंकित पत्रांक से मेल नहीं खा रहा है। प्राधिकरण इस संबंध में अपने एक पूर्व तहसीलदार समेत कुछ अन्य लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए विचार कर रहा है
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण:टीएम फर्जी या अधिकारी?









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