राजेश बैरागी।नोएडा प्राधिकरण ने आज उस काम की शुरुआत की जो सभी प्राधिकरणों को प्राथमिकता पर करना चाहिए। नोएडा प्राधिकरण ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के साथ मिलकर दो ऐसे अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया जो सेमीकंडक्टर प्रोद्योगिकी और कैंसर की भविष्य की दवाओं की खोज और उनके विकास पर शोध करेंगे।
केवल कंक्रीट के शहर बसाने वाले विकास प्राधिकरणों को जो कार्य दशकों पहले शुरू कर देना चाहिए था, वह कार्य अब संभवतः शुरू हो सकता है। नोएडा प्राधिकरण और गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय ने एक साझे उपक्रम में ‘टू स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने पर सहमति जताई है।आज गुरूवार को गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों का एक दल रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी के नेतृत्व में नोएडा प्राधिकरण पहुंचा और मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम के साथ ये सेंटर्स स्थापित करने पर लंबी चर्चा की।इन सेंटर्स में एक सेंटर फॉर सेमीकॉन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (सीएसआरटी) होगा और दूसरा सेंटर फॉर ड्रग्स डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट के नाम से जाना जाएगा।इन दोनों अनुसंधान एवं विकास केन्द्रों की स्थापना गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में होगी। इनसे सेमीकंडक्टर प्रोद्योगिकी और कैंसर की चिकित्सा के लिए नये नये शोध तो होंगे ही, इनसे उच्च कुशलता वाले रोजगार का सृजन भी होगा। आज की बैठक में इन केंद्रों की स्थापना के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था करने के लिए दोनों संस्थान (नोएडा व जीबीयू) वार्ता जारी रखेंगे। ऐसे संकेत भी दिए गए हैं कि इन केंद्रों की स्थापना व भविष्य में संचालन के लिए कुछ और संस्थानों यथा ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरणों को साझेदार बनाया जा सकता है।जीबीयू से आए दल में रजिस्ट्रार विश्वास त्रिपाठी के साथ डीन एकेडमिक प्रोफेसर राजीव वार्ष्णेय,डीन बायोटेक्नोलॉजी डॉ धनलक्ष्मी, बायोटेक्नोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ रेखा पुरिया,ईसी विभाग प्रमुख डॉ विदुषी शर्मा तथा डॉ मंगलदास शामिल थे। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरणों द्वारा विभिन्न प्रोद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी)से अपनी परियोजनाओं के निर्माण, जांच व निगरानी हेतु सहयोग लिया जा रहा है। यमुना प्राधिकरण अपने क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण से पहले अधिग्रहण से प्रभावित गांवों पर होने वाले सामाजिक समाघात एवं प्रभाव का आंकलन गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय से कराता है।इन सब कार्यों से संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों को न केवल अपने छात्रों को व्यवहारिक शिक्षा देने का अवसर प्राप्त होता है बल्कि उन्हें इन कार्यों के मेहनताने के तौर पर अच्छी खासी आमदनी भी होती है। इससे शिक्षण संस्थानों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में मदद मिलती है। नोएडा प्राधिकरण और गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय द्वारा मिलकर दो उत्कृष्ट केंद्र स्थापित करने से इस शिक्षण संस्थान के साथ साथ आसपास के क्षेत्र को भी लाभ होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है
जो प्राधिकरणों को करना चाहिए









Leave a Reply