राजेश बैरागी।क्या साधारण समझी जाने वाली बुखार,जुकाम व दर्द जैसी बीमारियों में आम लोगों द्वारा ली जाने वाली प्रचलित दवाएं स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकती हैं? देश की अधिकांश आबादी योग्य चिकित्सक की सलाह के बगैर अपनी चिकित्सा खुद करती है जिसके परिणामस्वरूप शरीर के अंगों को भारी नुक्सान पहुंचता है। इस संबंध में जागरुक करने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) की मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ पायल जैन ने आज एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। हालांकि योग्य चिकित्सक तक सभी लोगों की सहज पहुंच का प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है।
डॉ पायल जैन द्वारा जारी ‘से नो टू सेल्फ मेडिसिन’ शीर्षक से जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी मोटी समझी जाने वाली बीमारियों यथा बुखार,जुकाम,गले में खराश और शरीर में कहीं भी दर्द होने पर लोग अपनी समझ से सामान्य प्रचलित दवाएं, एस्टेरॉयड,पेनकिलर आदि ले लेते हैं। ऐसे अनेक रोगी प्रतिदिन जिम्स की ओपीडी में आते हैं जो लंबे समय से ऐसी दवाओं के उपयोग से गुर्दे,लीवर, फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंगों की बीमारी से ग्रस्त हो गये हैं। डॉ पायल जैन ने बताया कि बगैर उचित सलाह एस्टेरॉयड,पेनकिलर या एंटीबायोटिक का उपयोग बेहद हानिकारक हो सकता है। किसी भी दवा का सेवन योग्य चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए। पुराने पर्चे से नई बीमारी का इलाज करना खतरे को आमंत्रित कर सकता है। उन्होंने बताया कि बच्चों, बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं को अपनी मर्जी से दवा लेना अधिक हानिकारक हो सकता है। योग्य चिकित्सकों की सहज उपलब्धता न होने के प्रश्न पर डॉ पायल जैन ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है परंतु लोगों को अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से अच्छा है कि सरकारी चिकित्सालयों में जाकर इलाज कराएं। उन्होंने बताया कि जिम्स में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे छात्रों को अधिक से अधिक लोगों तक चिकित्सा के प्रति जागरुकता फैलाने की भावना विकसित की जा रही है। हालांकि उन्होंने निजी चिकित्सा क्षेत्र में चिकित्सकों की भारी भरकम फीस को लेकर चिंता जताई
बगैर सलाह ली गई दवा बन सकती है खतरा ए जान









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