राजेश बैरागी।आज प्रकाशित तीन समाचारों ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। नोएडा के थाना सेक्टर 126 में एक महिला अधिवक्ता को जबरन बैठाए रखने और उसके साथ बदतमीजी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जवाब तलब करने के चलते थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग 91 पर बुलंदशहर के दोस्तपुर गांव के जंगल में 9 बरस पहले मां बेटी के साथ गैंगरेप करने वाले अपराधियों को अदालत ने कसूरवार घोषित किया और बागपत के निकट ईस्टर्न पेरिफेरल पर एक ट्रक पलट जाने से ट्रक में लदी मछलियों को लूटने के लिए आसपास के लोगों में होड़ मच गयी और उन्होंने घायल लोगों को बचाने में कोई रुचि नहीं ली।हम वास्तव में किस समाज का हिस्सा हैं? अपने किसी मुवक्किल की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना पहुंची महिला वकील के साथ पुलिस का क्या व्यवहार होना चाहिए? क्या उसे नौ घंटे तक मनमाने तरीके से वह भी रात्रि के समय थाने में बैठाकर बदतमीजी से प्रताड़ित किया जाना किसी सभ्य समाज का आचरण हो सकता है? पुलिस पर तो समाज को सभ्य बनाए रखने की वरद जिम्मेदारी भी है।नौ वर्ष पहले बुलंदशहर क्षेत्र में हुए उस वीभत्स कांड से मानवता शर्मशार हुई थी। पुलिस ने उस वारदात को अंजाम देने वाले कई अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था।शेष बचे आरोपियों को न्यायालय सोमवार 22 दिसंबर को सजा सुनाएगी। उन्हें दोषी करार दिया गया है।उस घटना में दरिंदों ने बेबस मां बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया था। ऐसी स्थिति में जान और माल लुट जाना उतना दर्दनाक नहीं होता जितना अस्मत लुटना। ऐसे लोगों को क्या बिना कानूनी प्रक्रिया के मार दिया जाना चाहिए? यह प्रश्न एक संवेदनशील समाज के समक्ष आज भी उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा है। ईस्टर्न पेरिफेरल पर मछली लदे ट्रक के पलट जाने की घटना उतनी बड़ी नहीं है। ट्रक पलटने से अधिकांश मछलियां सड़क पर गिरकर मर गईं। यह भी कोई बड़ी बात नहीं थी। परंतु मुफ्त में मरी हुई मछलियां लूटने आए ग्रामीणों ने ट्रक सवार घायलों को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। राहगीरों ने उन्हें मानवता के नाते धिक्कारा परंतु वे मछलियां बटोरने में लगे रहे। क्या मछली दुर्लभ वस्तु है और क्या एक दिन मुफ्त में मिलने वाली ढेर मछलियों से जीवनभर के खाने की व्यवस्था हो सकती है? अंततः राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने वहां पहुंच कर न केवल मछली लुटेरों को खदेड़ा बल्कि घायलों को इलाज मुहैया कराया। इन तीनों मामलों में केवल एक चीज दांव पर लगी और वह थी मानवता








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