नोएडा प्राधिकरण:गहरे सीवर में दो सफाईकर्मियों की मौत पर  संविदा अभियंता की अस्थाई सेवा स्थगन की कड़ी कार्रवाई!

राजेश बैरागी।यह संभवतः 1995 की घटना है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम से संबंधित एक गहरे कुएं में कुछ अनियमितताओं की पुष्टि के लिए हम दो पत्रकारों ने वहां का दौरा किया। यह बात तत्कालीन मुख्य अनुरक्षण अभियंता एसपीएस चौहान को मालूम हुई तो उन्होंने हमें बहुत डांटा। उन्होंने इसलिए नहीं डांटा कि हमने उस निर्माणाधीन स्थल का दौरा किया था। बल्कि उनकी नाराजगी इस बात को लेकर थी कि हम बगैर सूचना दिए और बगैर सुरक्षा उपायों के उस स्थान पर गये। उन्होंने हमसे कहा,-यदि तुम लोगों को कुछ हो जाता तो मैं क्या जवाब देता।’ क्या नोएडा प्राधिकरण में शीर्ष पदों पर कार्यरत अभियंताओं में आज यह संवेदनशीलता थोड़ी सी भी बची है? यदि ऐसा होता तो सेक्टर 115 में दो दिन पहले 16 अगस्त को गहरे सीवर की सफाई के लिए उतरे दो सफाईकर्मियों की अकाल मृत्यु नहीं होती। तंत्र की लापरवाही का शिकार होने वाले अनपढ़ जैसे सफाईकर्मी रोजगार की खातिर गहरे सीवर में यह जाने बगैर उतर जाते हैं कि जहरीली गैस से सामना होने पर क्या होगा। ऐसे लोग रोजी रोटी की खातिर जिंदगी का दांव हार जाते हैं तो उनके परिजनों को यह तंत्र कुछ लाख रुपए के मुआवजे का अनुदान देने का उपकार करता है। फिर घटना की जांच की रस्म अदायगी की जाती है जैसे इस मामले में अदा की गई है। प्राधिकरण द्वारा जारी एक प्रेस नोट में बताया गया है कि उक्त घटना की जांच अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश द्वारा की गई और कर्तव्य में लापरवाही के लिए प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक अशोक वर्मा, प्रबंधक पवन बरनवाल तथा संविदा के जेई अनिल वर्मा को दोषी पाया गया।जरा दो लोगों की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों पर प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई पर गौर कीजिए। प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधक को प्रतिकूल टिप्पणी दी जाएगी और संविदा के जेई की सेवा तीन महीने के लिए स्थगित की गई है। यह प्राधिकरण का अपना न्याय विधान है। प्रत्यक्ष तौर पर दो लोगों की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों पर यह कार्रवाई अन्यत्र दुर्लभ है। दिलचस्प बात यह है कि इस घटना के लिए जल सीवर विभाग के प्रमुख अभियंता की जिम्मेदारी पर कोई विचार नहीं किया गया है। प्रेस नोट में भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को न होने देने के लिए किसी प्रकार की कार्ययोजना तैयार करने का भी कोई जिक्र नहीं है। मुझे लगता है कि वर्तमान हालात को देखते हुए इस पोस्ट के प्रारंभ में वर्णित घटना को लेकर तत्कालीन मुख्य अनुरक्षण अभियंता की चिंता व्यर्थ थी। दो पत्रकार अनजाने में जान गंवा देते या दो सफाईकर्मियों ने तंत्र की लापरवाही से जान गंवा दी। दोनों घटनाओं में क्या कोई अंतर है?(

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