नोएडा प्राधिकरण: गेझा फर्जी मुआवजा मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों की एस आई टी बनाने और प्राधिकरण के कामकाज पर निगरानी के लिए चीफ विजिलेंस आफिसर की नियुक्ति का सुप्रीम आदेश 

राजेश बैरागी।सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण के गेझा गांव की भूमि के चर्चित फर्जी मुआवजा मामले में गठित एसआईटी की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले की व्यापक जांच के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक नई एसआईटी गठित करने तथा नोएडा प्राधिकरण के कामकाज पर सतत् निगरानी रखने के लिए एक मुख्य सतर्कता अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है।
उल्लेखनीय है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित गांव गेझा की भूमि के दोबारा करोड़ों रुपए मुआवजा देने के फर्जीवाड़े में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट पिछले दिनों दाखिल कर दी थी। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली इस एसआईटी में मेरठ मंडलायुक्त व मेरठ जोन के एडीजी सदस्य थे। उक्त एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस मामले में लिप्त प्राधिकरण के अधिकारियों तथा उनके संबंधियों के खातों तथा संपत्तियों की जांच करने, नोएडा प्राधिकरण के द्वारा किए जा रहे अंधाधुंध विकास कार्यों का औचित्य जानने तथा प्राधिकरण के कामकाज पर सतत् निगरानी रखने की आवश्यकता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह रिपोर्ट स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक नई एसआईटी गठित करने, प्राधिकरण में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण की सभी बड़ी परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट की हरित पीठ से पूर्व अनुमति लेने की बंदिश भी लगा दी है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल रिपोर्ट में राजस्व परिषद अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में नगर निगम जैसी संस्था के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गेझा गांव मुआवजा फर्जीवाड़े में फंसे अधिकारियों की मुसीबत और बढ़ सकती है।(

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