निक्की भाटी मृत्यु कांड:रीयल गर्ल से रील गर्ल तक प्रश्न ही प्रश्न 

राजेश बैरागी।क्या यह सच है कि कोई भी लड़की मां की कोख से अंग प्रदर्शित करने वाले कपड़े पहन कर पैदा नहीं होती? और क्या यह भी सच है कि इस दुनिया के बाजार में बिक्री होने वाले छोटे कपड़ों को पहनकर ही कोई लड़की अंग प्रदर्शन के लिए विवश होती है? ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में निक्की भाटी नामक बहू/बेटी की संदिग्ध मौत के बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर मचे कोहराम से उपरोक्त प्रश्नों ने मुझे आंदोलित किया है। निक्की भाटी और उसकी बड़ी बहन का विवाह सात आठ बरस पहले दो सगे भाइयों से हुआ था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर,जाट, यादव,राजपूत बाहुल्य गांवों में यह आम बात है। एक साथ दो बेटियों को एक घर में ब्याहने का निर्णय निस्संदेह लड़के वालों की ऊंची साख का परिचायक है।विवाह उपरांत पति-पत्नी के रिश्तों में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। यदि इस परस्पर रिश्ते में वर या वधू पक्ष अपनी-अपनी महत्वपूर्ण किंतु सीमित भूमिका का निर्वाह करते रहें तो खट्टे कड़वे अनुभवों के बावजूद यह रिश्ता निरंतर आगे बढ़ता जाता है। इस संदिग्ध मृत्यु कांड का एक सच यह है कि मृतका शौक और आत्मनिर्भरता की संयुक्त पूर्ति के लिए रील बनाती थी।रील बनाना कोई अपराध नहीं है। परंतु प्रत्येक समाज और क्षेत्र की अपनी मर्यादाओं को लांघने से पहले उसके परिणामों को जानना अत्यंत आवश्यक होता है। निम्न मध्यमवर्गीय उत्तर भारतीय समाज वर्तमान में जिस संक्रमण काल से गुजर रहा है, उसमें रील बनाना अधिकार है या असभ्यता है, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है। निक्की इसी प्रश्न के दोराहे पर खड़ी ऐसी लड़की दिखाई पड़ती है जिसे मर्यादाओं को लांघने में कुछ भी ग़लत नहीं लगता है परंतु आम समाज के लिए यह आसान नहीं है। निक्की ने आत्महत्या की जैसा कि कुछ वीडियो चुगली कर रहे हैं या उसकी हत्या की गई जैसा कि उसके मायके वाले और कुछ अन्य लोग कह रहे हैं, यह पुलिस की जांच का विषय है। हालांकि इस प्रकार के मामलों में पुलिस की जांच उपलब्ध तथ्यों तथा जनभावनाओं के दबाव की सतमेल खिचड़ी हो सकती है और हो सकता है कि वास्तविकता से हम कभी साक्षात्कार न कर पाएं। इस मामले का एक अन्य और रोचक पहलू यह है कि निक्की की भाभी को भी प्रताड़ित कर विवाह संबंधों को तोड़ा जा चुका है और उसके बदले में दी जाने वाली मुआवजा राशि के गारंटर निक्की के ससुराल वाले हैं।उसी राशि की मांग को बहुत खूबसूरती से दहेज मांग का चोला पहना दिया गया है। मैं वापस कथित आधुनिक होने के कुतर्क के साथ लड़कियों द्वारा पहने जाने वाले अंग दिखाऊ छोटे कपड़ों की बाजार में उपलब्धता और उन्हें खरीदकर अंग न ढंकने के लिए पहनने के निर्णय के प्रश्न पर लौटता हूं। क्या यह कोई विवशता है? क्या ऐसा किया जाना आवश्यक है? रीयल गर्ल से रील गर्ल बनने वाली कथित आधुनिक युवतियों के लिए घर संभालना आवश्यक है या अपनी नग्न स्वतंत्रता की रक्षा करना? निक्की भाटी की अकाल मृत्यु हम निम्न मध्यमवर्गीय उत्तर भारतीय समाज को इन्हीं प्रश्नों के उत्तर तलाशने की चुनौती पेश करती है।

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