फोनरवा वर्सेज एनईए

राजेश बैरागी।नोएडा के निवासियों की तथाकथित सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (फोनरवा) के आज एकतरफा चुनाव हो रहे हैं। उधर नोएडा के उद्यमियों की सर्वोच्च संस्था नोएडा आंत्रप्रेन्योरस एसोसिएशन (एन ई ए) ने अपने द्विवार्षिक चुनाव आगामी 15 जनवरी को कराने की घोषणा की है। दोनों संस्थाओं और उनके चुनावों में क्या अंतर है?इन दोनों संस्थाओं में पिछले लंबे समय से प्रमुख पदों पर निरंतर कुछ लोग ही निर्वाचित होते आ रहे हैं परंतु एक संस्था नोएडा के नागरिकों पर भार समान है जबकि दूसरी संस्था अपने सदस्यों की आशाओं का प्रतीक बनी हुई है।
नोएडा के नागरिकों (सेक्टर निवासियों) की सर्वोच्च संस्था होने का दावा करने वाली फोनरवा का द्विवार्षिक चुनाव आज हो रहा है। इस चुनाव में केवल योगेन्द्र शर्मा पैनल के प्रत्याशियों ने ही नामांकन किया है।उनका निर्विरोध निर्वाचित होना तय है। योगेन्द्र शर्मा और उनकी टीम पिछले छः वर्षों से फोनरवा का नेतृत्व कर रही है।क्या योगेन्द्र शर्मा और उनकी टीम पर नोएडा के नागरिकों का इतना भरोसा है कि कोई उनके समक्ष चुनाव लड़ने ही नहीं आया या फोनरवा को लेकर नोएडा के नागरिकों में कोई आकर्षण ही नहीं बचा है? इस प्रश्न को हल करने से पहले नोएडा के उद्यमियों की सर्वोच्च संस्था एन ई ए चलते हैं जहां द्विवार्षिक चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। यहां भी 21 सदस्यीय कार्यकारिणी ही होती है परंतु 130 से अधिक सेक्टर प्रतिनिधि भी होते हैं। सेक्टर प्रतिनिधि प्रत्येक 15 फैक्ट्रियों पर एक के हिसाब से चुने जाते हैं। परंतु इस संस्था के पदाधिकारियों का चुनाव नोएडा में कार्यरत फैक्ट्री मालिकों द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से किया जाता है।फोनरव के पदाधिकारियों का चुनाव पहले से निर्वाचित रेजीडेण्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिवों द्वारा किया जाता है। इस चुनाव में नोएडा के नागरिक प्रत्यक्ष मतदान से वंचित रहते हैं।एन ई ए में भी एक बार फिर पिछले पंद्रह वर्षों से नेतृत्व कर रहे विपिन मल्हन और उनकी टीम के ही निर्वाचित होने की पूरी संभावना है। पंद्रह वर्ष पूर्व मृतप्राय हो चुकी एन ई ए को पुनर्जीवित करने के साथ नोएडा के प्रत्येक उद्यमी के हितों की रक्षा के लिए विपिन मल्हन और उनकी टीम रात-दिन प्रयासरत रहती है। सेक्टर प्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्रों में विशेष सक्रिय रहकर उद्यमियों की समस्याओं को सुलझाते हैं। फोनरवा में ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रत्येक सेक्टर की आरडब्ल्यूए अपनी समस्याओं से खुद जूझती है। शहर के नागरिकों को लेकर फोनरवा का कभी कोई व्यापक दृष्टिकोण सामने नहीं आया जबकि एन ई ए हमेशा उद्यमियों के हित में प्राधिकरण और अन्य विभागों के साथ निरंतर नीति निर्माण और सुविधाओं का प्रस्ताव रखती रहती है।फिर भी फोनरवा के चुनाव में विधायक और सांसदों तक की रुचि किसी से छिपी नहीं है

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