राजेश बैरागी।कांग्रेस और दूसरे विपक्षी राजनीतिक दल ऐसा क्यों सोचते हैं कि भाजपा हमेशा सत्ता में रहेगी और वो विपक्ष में।मानसून सत्र में पेश राज्य और केंद्र सरकारों के अहम् पदों पर आसीन होने वाले राजनेताओं को गंभीर आपराधिक मामलों में तीस दिन अथवा उससे अधिक अवधि तक हिरासत में रहने पर पदत्याग करने वाले विधेयकों का विरोध केवल इस आधार पर किया जा रहा है कि केंद्र में भाजपा नीत सरकार है।विपक्ष को यह भय है कि केंद्र सरकार इन विधेयकों का उपयोग विपक्षी दलों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए कर सकती है। हालांकि फिलहाल इन तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को विचार विमर्श के लिए भेज दिया गया है।यहां यह प्रश्न प्रासंगिक है कि क्या केंद्र में हमेशा भाजपा नीत सरकार ही सत्ता में रहेगी?विपक्ष का विरोध इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द ही है। एक काल्पनिक प्रश्न यह है कि आने वाले समय में कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के केंद्र में सत्तारूढ़ होने पर ये विधेयक उसके लिए भी तो हथियार बन सकते हैं। धारा 356 का अब तक सर्वाधिक उपयोग किसने किया है? इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस की केंद्र सरकारों ने विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को बर्खास्त करने के लिए धारा 356 का बार बार उपयोग किया। यह बहस का विषय हो सकता है कि वह उपयोग उचित था या अनुचित। परंतु हमेशा जो अधिकार सत्तारूढ़ दल के लिए उचित होता है,विपक्ष के लिए वह अनुचित होता है। सत्ता में आने के बाद उसी अधिकार का औचित्य बदल जाता है। हालांकि अहम् पदों पर बैठने वाले राजनीतिक लोगों से उच्च नैतिकता और कानून के पालन की अपेक्षा की जाती है।उनका चरित्र प्रत्येक नागरिक के लिए आदर्श प्रस्तुत करने वाला होना चाहिए। यह अलग बात है कि राम यदि अपने चरित्र को आदर्श मानते थे तो रावण भी अपने चरित्र को कमतर नहीं मानता था। वर्तमान परिदृश्य में सत्ता के शीर्ष पर बैठने वाले लोगों की अपनी चारित्रिक परिभाषाएं हैं जिन्हें लेकर उनमें तनिक भी हया शर्म की भावना नहीं है। कानून नागरिकों को अच्छा बने रहने के प्रति जागरूक करता है। चरित्र निर्माण कानून का काम नहीं है।इसी प्रकार कानून से नैतिकता की स्थापना नहीं की जा सकती है। कानून केवल चारित्रिक और नैतिकता से गिरने वालों को दंडित कर सकता है। इस दंड से स्वयं को ऊपर समझने वाले लोग ही कानून की स्थापना से भयभीत होते हैं। यही भय उन्हें कानून का विरोध करने का साहस प्रदान करता है
शीर्ष राजनीतिक पदों पर बैठने वालों के लिए कानून









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