2023 से पहले नोएडा ग्रेटर नोएडा यीडा में भूमि पुनर्ग्रहण के बकाया भुगतान का मामला:कैबिनेट करेगी फैसला

राजेश बैरागी।क्या जनपद गौतमबुद्धनगर में कार्यरत तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों को सरकारी भूमि पुनर्ग्रहण का बकाया लगभग एक हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ सकता है?दो वर्ष पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राधिकरणों के क्षेत्र में आने वाले सभी गांवों में उपलब्ध सरकारी भूमि को निशुल्क करने के शासनादेश के बाद जिलाधिकारी द्वारा 2023 से पहले पुनर्ग्रहित भूमि का बकाया मांगने का मामला शीघ्र ही योगी सरकार की कैबिनेट में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
दरअसल 17 जुलाई 2023 को एक शासनादेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले गांवों में अवस्थित सरकारी भूमि को प्राधिकरणों के पक्ष में पुनर्ग्रहण निशुल्क कर दिया था। परंतु इस शासनादेश से पहले पुनर्ग्रहित ऐसी भूमि का करोड़ों रुपया प्राधिकरणों पर बकाया है। अकेले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर 2017 से 2023 तक ऐसी पुनर्ग्रहण की गई लगभग तीन सौ हेक्टेयर भूमि का लगभग आठ सौ करोड़ रुपए जबकि नोएडा प्राधिकरण पर सौ करोड़ और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यीडा पर 67 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। चूंकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) आदि सरकारी भवनों के लिए निशुल्क भूमि दी है। इसलिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 2017 से 2023 के बीच पुनर्ग्रहित भूमि का बकाया भुगतान से इंकार करता है जबकि जिलाधिकारी द्वारा उक्त भूमि के मद में प्राधिकरण से पैसा भुगतान करने की मांग की जाती है। चूंकि दोनों ही सरकारी संस्थान हैं, लिहाजा इस संबंध में निर्णय के लिए मामला सरकार के द्वार तक जा पहुंचा है। सूत्रों के अनुसार इस मामले को शीघ्र ही कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में रखा जा सकता है।इसके विपरीत देवला और शाहबेरी गांवों के भूमि अधिग्रहण के मद में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति के खाते में जमा किए गए 280 करोड़ रुपए वापस प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।इन दोनों गांवों की भूमि का अधिग्रहण रद्द हो गया था

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