नोएडा प्राधिकरण:मुख्य कार्यपालक अधिकारी के आदेश पर कूड़ा ढूंढने को सारे अधिकारी निकल पड़े

राजेश बैरागी।क्या किसी बड़ी घटना या हादसे के बाद संबंधित प्राधिकरण के अधिकारी सजग होकर अपनी जिम्मेदारी निभाने लगते हैं? मोबाइल, सोशल मीडिया और सेल्फी के इस युग में जहां एक आम नागरिक भी व्हिसलब्लोअर बन गया है वहीं अधिकारियों में अभी भी सुनियोजित तरीके से काम करने की अपेक्षा उच्चाधिकारियों को दिखाने के लिए फोटो खिंचवाने की ही प्रवृत्ति बनी हुई है।
नोएडा प्राधिकरण के नये मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मातहत अधिकारियों को शहर में नागरिक सुविधाओं को पूरी सतर्कता के साथ दुरुस्त करने का आदेश दिया था। उन्होंने ऐसे समय में प्राधिकरण की बागडोर संभाली है जब सेक्टर 150 स्थित एक बेसमेंट के गड्ढे में भरे पानी में पिछले माह एक इंजीनियर की डूबकर मौत होने की घटना ज्वलंत है।चूंकि कृष्णा करुणेश यहीं पर पिछले आठ माह से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के तौर पर बहुत सी जिम्मेदारी निभा रहे थे, इसलिए वे शहर की आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने विशेष तौर पर अभियांत्रिकी विभाग को जल,सीवर, सड़कों और साफ सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त करने के आदेश दिए। शहर की साफ-सफाई के लिए प्राधिकरण द्वारा कूड़ा निस्तारण एक बड़ा काम है। इसके लिए प्राधिकरण द्वारा समूचे शहर में लगभग पांच हजार सफाईकर्मी लगाए गए हैं। एक निजी कंपनी भी आठ सौ कर्मचारियों के साथ कूड़ा उठाने के काम के लिए नियुक्त है। अभियांत्रिकी विभाग के संबंधित अधिकारियों को साफ-सफाई के काम का प्रबंधन और निगरानी का दायित्व निभाना होता है।नयी व्यवस्था के अनुसार अधिकारी न केवल कूड़ा पड़े होने वाले स्थानों पर पहुंचते हैं बल्कि कूड़ा डालने वाले लोगों की भी पहचान करते हैं। यह सारा काम कैमरे की निगरानी में किया जाता है।बस यही वह बिंदु है जहां अधिकारी प्रबंधन को ताक पर रखकर परफॉर्मेंस दिखाने के लिए फोटो खिंचवाने में सारी ऊर्जा खपाने लगते हैं। बताया गया है कि रोजाना अधिक से अधिक अधिकारी किसी एक स्थान पर इकट्ठा होकर कूड़े के साथ फोटो खिंचवाकर प्राधिकरण अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप पर डालते हैं। यही अधिकारी कुशल प्रबंधन के तहत अलग-अलग स्थानों पर जाकर कूड़ा उठाने और निस्तारण की व्यवस्था कर सकते हैं। ऐसा करने से परफॉर्मेंस खुद ब खुद सुधर जाएगी।अपने समय की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म ‘जीने की राह’ के सदाबहार गीत के ये बोल यहां सटीक बैठते हैं -चंदा को ढूँढने सभी तारे निकल पड़े गलियों में वो नसीब के मारे निकल पड़े।इस गीत की इन पंक्तियों में चंदा के स्थान पर कूड़ा और तारे के स्थान पर अधिकारी रखने से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी

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