राजेश बैरागी।यमुना आजकल अविरल बह रही है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना को मां कहते हुए उसे अविरल बहाने का संकल्प जताया। उत्तराखंड के कालिंद पर्वत से निकलकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से गुजरती हुई यमुना नदी 892 मील अर्थात 1436 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद अपने पाप और पुण्य समेत प्रयागराज में मां गंगा की गोद में समा जाती है। मैंने लगभग तीन वर्ष पहले इस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे से यात्रा करने के दौरान एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर जहां तक दृष्टि जाती थी, सूखी हुई यमुना को देखा था।देश की बड़ी नदियों में शुमार यमुना को लोग बगैर पांव भिगोए पैदल पार कर रहे थे।उस समय हरियाणा में खच्चर क्षमा करें, खट्टर सरकार और दिल्ली में केजरीवाल सरकार थी। दोनों यमुना के जल पर अधिकार को लेकर तलवारें भांज रहे थे जबकि यमुना सूखी पड़ी थी। यमुना प्रत्येक वर्ष केवल वर्षा में अविरल बहती है। हथिनी कुंड के जल भंडार से छोड़े जाने वाला पानी जब दिल्ली के दर पर दस्तक देता है तो दिल्ली दहलने लगती है। पिछले वर्ष बरसात में यमुना का जल न्याय की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट के दर तक पहुंच गया था। क्या कालिंद पर्वत से निकलने वाली यमुना बरसात के मौसम के अलावा भी कभी दिल्ली पहुंचती है? यदि नहीं तो फिर दिल्ली में दिखाई देने वाली यमुना कहां से पैदा होती है? चूंकि दिल्ली की यमुना दिल्ली में ही सीवरेज और गंदे नालों से पैदा होती है और फिर उसी यमुना के जल को धो मांजकर दिल्लीवासी अपने हलक की प्यास बुझाने से लेकर दिनचर्या के अन्य कामों को अंजाम देते हैं।उस यमुना को दिल्ली में दिल्ली की मुख्यमंत्री कैसे अविरल बहा सकती हैं? प्रश्न इतना कठिन भी नहीं है परंतु इस प्रश्न को हल करने के लिए जिस इच्छाशक्ति की दरकार है,वह कहीं दिखाई नहीं देती।यमुना को मां कहें या बहिन भतीजी कहें, परंतु उसे अबला स्त्री समझकर उसके साथ………… तो न करें
हे यमुना मैया









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