गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की हरनंदीपुरम परियोजना:120 हेक्टेयर भूमि पर पहले चरण के विकास पर लगी सबकी निगाहें

राजेश बैरागी।क्या गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी परियोजना हरनंदीपुरम केवल 120 हेक्टेयर भूमि पर विकसित होगी? प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने कल बुधवार को सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ अपनी पहली प्रेसवार्ता में इस परियोजना को तीन चरणों में विकसित करने और 120 हेक्टेयर भूमि पर प्रथम चरण का विकास करने की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने गाजियाबाद नगर में चौधरी मोड़,हापुड़ चुंगी व हापुड़ मोड़ तिराहे समेत यातायात जाम के लिए कुख्यात सात स्थानों पर तकनीक और इंजीनियरिंग के माध्यम से निर्बाध आवागमन की सुविधा विकसित करने की भी प्रतिबद्धता जताई।
जिस महत्वाकांक्षी आवासीय भूखण्ड परियोजना हरनंदीपुरम के सपने को लेकर पूर्व उपाध्यक्ष अतुल वत्स विदा हुए, उसे साकार करने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वर्तमान उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई है।तीन गांवों की अमूमन 120 हेक्टेयर भूमि पर हरनंदीपुरम के प्रथम चरण को विकसित कर योजना लांच कर दी जाएगी जिससे प्राधिकरण को न केवल आमदनी होगी बल्कि आगे भूमि खरीदने के लिए आवश्यक धन भी उपलब्ध हो जाएगा। उपाध्यक्ष श्री कलाल ने बताया कि प्रथम चरण के लिए आवश्यक भूमि के 85 प्रतिशत हिस्से को सीधे खरीदने के लिए किसानों से सहमति प्राप्त हो चुकी है। दरअसल हरनंदीपुरम परियोजना पर गाजियाबाद से लेकर लखनऊ तक सबकी निगाहें बताई जाती हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की यह बहुप्रतीक्षित आवासीय भूखण्ड परियोजना है जो 22 वर्ष बाद आ रही है। जहां यह परियोजना विकसित की जाएगी, वह लोकेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहां भूमि की बाजार दरें आसमान छू रही हैं। निजी कॉलोनाइजर इस परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि पर नजर गड़ाए हुए हैं। किसानों के उग्र विरोध के चलते वर्तमान परिस्थितियों में प्राधिकरण के लिए हरनंदीपुरम के लिए निर्धारित 500 हेक्टेयर भूमि हासिल करना संभव नहीं है। ऐसे में प्रथम चरण के रूप में 120 हेक्टेयर भूमि पर इस परियोजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। बहुत संभावना है कि हरनंदीपुरम परियोजना केवल प्रथम चरण में ही सिमट कर रह जाए

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