अवैध कॉलोनियों की रक्षा में आगे आई भाकियू 

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अतिक्रमण रोधी कार्रवाई का आमका गांव में अधोपतन

राजेश बैरागी।आज यह साफ हो गया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा घोषित एक महीने (20 जून से 20 जुलाई) तक चलने वाला अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध अभियान अब बामुश्किल ही चलेगा। ग्रेटर नोएडा के दिल्ली हावड़ा रेल लाइन के उस पार गांव आमका में मात्र तीन खसरा संख्या 204,205 और 206 पर बसाई जा रही एक अवैध कॉलोनी को ध्वस्त करने पहुंचे प्राधिकरण के दस्ते को पुलिस की उपस्थिति में खदेड़ दिया गया। इस दौरान प्राधिकरण के दस्ते पर एक गाड़ी से टक्कर मारने का प्रयास भी किया गया परंतु दर्ज एफआईआर में जानलेवा हमले की धारा नहीं है। इस समूचे प्रकरण में दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीणों की आबादी, आवासीय भूखण्ड और लीज बैक मामले उठाने वाली भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने खुलकर प्राधिकरण की नजर में अवैध रूप से बसाई जा रही कॉलोनी की हिमायत की। प्राधिकरण सूत्रों का दावा है कि एक स्थानीय भाजपा जनप्रतिनिधि का भी इस अवैध कॉलोनी को संरक्षण प्राप्त है। आज शनिवार को हुए इस प्रकरण को लेकर कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। एक तो यह कि प्राधिकरण का अतिक्रमण हटाओ दस्ता केवल उन तीन खेतों पर बसाई जा रही अवैध कॉलोनी को तोड़ने ही क्यों गया जबकि उसके आसपास और रूपवास गांव से लेकर चिपियाना गांव तक एक खेत भी अवैध कॉलोनियों से खाली नहीं है।दूसरा प्रश्न यह है कि भाकियू क्या अब अवैध कॉलोनियों की सुरक्षा भी करेगी, हालांकि उसके प्रैस नोट में कहा गया है कि प्राधिकरण किसानों के पुराने मकानों को तोड़ रहा था। तीसरा और महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इस प्रकार की कार्रवाई में पुलिस की भूमिका क्या है? आज हुई इस घटना के दौरान पुलिस का रवैया बेहद गैर प्रोफेशनल था। बताया गया है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के हस्तक्षेप पर एफआईआर में तस्करा डाल कर सीएल एक्ट की धारा 7 की बढ़ोतरी की गई। मैं पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी व गाजियाबाद विस्तार में की जा रही अतिक्रमण रोधी कार्रवाई से अभिभूत हूं। जीडीए अपनी पुलिस फोर्स लेकर इस प्रकार की कार्रवाई को सफलता पूर्वक अंजाम दे रहा है। उसके द्वारा जारी किए जाने वाले प्रैस नोट में अवैध कब्जा करने वाले लोगों के नाम उजागर किए जाते हैं जबकि नोएडा ग्रेटर नोएडा में ऐसा नहीं होता है। यह बेहद सरलता से समझ में आने वाली बात है कि नोएडा ग्रेटर नोएडा में तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण और अवैध कॉलोनियों के निर्माण में सत्तारूढ़ पार्टी के साथ सभी का हाथ है। क्या प्राधिकरण के अधिकारी खासतौर पर वर्क सर्किलों के अधिकारी व कर्मचारी अपनी सत्यनिष्ठा की शपथ उठा सकते हैं? तो फिर यह अभियान चलाने और बेइज्जती कराने का नाटक करने की आवश्यकता ही क्या है?

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