राजेश बैरागी।पत्रकारों को ऐसे संदेश बहुधा प्राप्त होते हैं।लोग अपने शत्रुओं, जिन्हें पसंद न करते हों उन्हें तथा अपने ऐसे सहयोगियों को जिनसे उनकी शत्रुता तो नहीं होती है परंतु उन्हें कष्ट पहुंचाकर आनंद का अनुभव करना चाहते हैं, के विरुद्ध ऐसे संदेशे पत्रकारों को भेजकर अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास करते हैं। मुझे भी एक सामान्य परिचित ने एक ऐसा ही अग्रसारित संदेश भेजा है जिसमें तीनों प्राधिकरणों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के तीस लोगों के नाम हैं। प्रत्येक प्राधिकरण से केवल 10 लोगों के नाम लेना कौतूहल पैदा करता है। इनमें दस प्रतिशत महिलाओं यानी तीन महिला अधिकारियों के नाम भी हैं।इन सभी की कई कई बेनामी संपत्तियों का ब्यौरा दिया गया है। संदेश भेजने वाले ने अपना नाम गुप्त रखा है। दावा किया गया है कि उल्लिखित संपत्तियां सामने दर्शाए गए नाम वाले अधिकारी की ही हैं। इनमें कुछ अधिकारी अंतर प्राधिकरण तबादलों के तहत इधर से उधर पहुंच गए हैं। ऐसे संदेशे क्या संदेश देते हैं? बेनामी संपत्तियों के मामले में यह साबित करना एक चुनौती है कि वास्तव में उस संपत्ति का स्वामी वही अधिकारी है जिसके लिए दावा किया गया है। प्राधिकरणों में व्याप्त भ्रष्टाचार में केवल तीस लोग ही शामिल हों,यह असंभव है। यह उन अधिकारियों कर्मचारियों की साख पर भी प्रश्न है जिन्होंने पूरी क्षमता अवैध रूप से धन उलीचने में लगा दी और यह सूची बनाने वाले की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। अवैध धन से एक सीमा के बाद बेनामी संपत्तियां खरीदना ही एकमात्र उपाय होता है। नब्बे के दशक में नोएडा प्राधिकरण में नियुक्त रहे एक अधिकारी ने यहां वहां नियुक्तियों के दौरान धन अर्जित करने में कोई कोताही नहीं की। उन्होंने अपने साले, साढ़ू जैसे ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों के नाम संपत्तियां खरीद खरीद कर रख छोड़ीं। कालांतर में आवश्यकता पड़ने पर उन सभी रिश्तेदारों ने उन्हें बाबाजी का ठुल्लू दिखा दिया। बाद में वह अधिकारी आध्यात्मिक ज्ञान देने लगे थे जिसमें इस संसार की नश्वरता का उल्लेख अनिवार्य रूप से करते थे। यहां यह उल्लेखनीय है कि अवैध रूप से अर्जित धन से भाई भतीजों के नाम संपत्ति खरीदने के मामले बामुश्किल ही सामने आते हैं। बहरहाल तीस लोगों के नाम वाला यह बेनामी संपत्ति से संबंधित संदेश मेरे लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। बगैर तफ्तीश किए केवल बेनामी संदेशवाहक के संदेश के आधार पर समाचार अथवा आलेख प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। क्या उन लोगों से दरियाफ्त की जा सकती है जिनके नाम इस संदेश में हैं? मुझे बिल्कुल आशा नहीं है कि कोई इस प्रकार के प्रश्नों के ईमानदार उत्तर देगा। सरकार हर वर्ष संपत्तियों की उद्घोषणा का जो आदेश जारी करती है,उसका ही मान-सम्मान नहीं होता, मेरे प्रश्नों का उत्तर देना तो उनकी बाध्यता भी नहीं है
बेनामी संपत्तियों का बेनामी संदेश









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