राजेश बैरागी।गाजियाबाद नगर निगम ने बीते सप्ताह दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। लंबे समय से लंबित निगम की 1702 दुकानों में से 407 दुकानों के किराए से संबंधित विवाद को दुकानदारों की सहमति से सुलझा लिया गया। एक और उपलब्धि निगम मुख्यालय स्थित आग लगने से क्षतिग्रस्त सदन व कार्यकारिणी कक्ष को जीर्णोद्धार के बाद लोकार्पित कर हासिल की गई।
गाजियाबाद घंटाघर स्थित गोल मार्केट के 407 दुकानदारों के लिए सिरदर्द बनी किराया निर्धारण की समस्या बीते सप्ताह समाप्त हो गई। महापौर सुनीता दयाल तथा निगमायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक द्वारा वरिष्ठ पार्षदों एवं अधिकारियों की संयुक्त समिति द्वारा गत 18 फरवरी को पेश की गई रिपोर्ट पर दुकानदार प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। निगम और दुकानदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए भूतल पर बनी दुकान का 4000 किराया, पहली मंजिल पर बनी दुकान का 2000 किराया, खोके का 3000 किराया को लेकर समिति की सहमति बनी। उसके साथ साथ दुकानों के किराए में 3 वर्ष में 12.5% की बढ़ोतरी की गई और तीन लाख रुपए नाम परिवर्तन शुल्क तय किया गया।नगर आयुक्त द्वारा बताया गया इसी क्रम में रामानुज दयाल मार्केट तथा कवि नगर में अन्य सामान्य दुकानों के किराए पर भी समिति द्वारा बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नगर निगम की यह दुकानें आधी सदी पूर्व आवंटित की गई थीं। यह निगम की संपत्ति शक्ति के साथ नियमित आय का भी एक बड़ा साधन हैं।
इसी प्रकार गाजियाबाद नगर निगम मुख्यालय में सदन कक्ष तथा कार्यकारिणी कक्ष का जीर्णोद्धार कराया गया जिसका लोकार्पण महापौर सुनीता दयाल द्वारा किया गया।सदन कक्ष में 100 पार्षदों तथा अधिकारियों के बैठने की समुचित व्यवस्था कराई गई है lनगर आयुक्त द्वारा बताया गया कि आग लगने के बाद पूर्ण रूप से सदन कक्ष खराब हो गया था।महापौर द्वारा बताया गया कि 57 लाख से कार्यकारिणी कक्ष तथा 75 लाख से सदन कक्ष का जीर्णोद्धार किया गया।(
गाजियाबाद नगर निगम-दो बड़ी उपलब्धियां:1702 में से 407 दुकानों के किराए का हुआ निर्धारण और सदन व कार्यकारिणी कक्षों का जीर्णोद्धार के बाद किया गया लोकार्पण









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