गाजियाबाद विकास प्राधिकरण भी ढाई सौ हेक्टेयर भूमि पर विकसित करेगा औद्योगिक टाउनशिप,मधुबन बापूधाम योजना के किसानों की भी भरेगी झोली 

राजेश बैरागी।क्या केवल नगरीय विकास के लिए गठित गाजियाबाद विकास प्राधिकरण भी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में अपना योगदान देने की तैयारी कर रहा है? प्राधिकरण बोर्ड की आज मंगलवार को हुई 170वीं बैठक में गांव सैदपुर हुसैनपुर डीलना की लगभग ढाई सौ हेक्टेयर भूमि पर एक नयी औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।इसी बैठक में 21 वर्षों से रुकी खड़ी महत्वपूर्ण मधुबन बापूधाम आवासीय योजना के किसानों को अधिग्रहित भूमि के बदले छः प्रतिशत विकसित भूमि और बीस प्रतिशत विकसित भूखंड के दोहरे लाभ देने का निर्णय लेकर लगभग चार हजार करोड़ रुपए की बंधक संपत्तियों को विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रस्ताव भी स्वीकृत हो गया।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की 170वीं बोर्ड बैठक आज दिनांक 2 सितम्बर को मेरठ मण्डल के आयुक्त एवं प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद की अध्यक्षता में आयोजित हुई। उपाध्यक्ष अतुल वत्स सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में कुल 16 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें कई ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगी।
बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि लंबे समय से अटकी मधुबन-बापूधाम योजना को लेकर रही। उपाध्यक्ष श्री अतुल वत्स ने बताया कि वर्ष 2004 से चली आ रही भूमि जुटाव की दिक्कतों, किसानों के विरोध और न्यायालयी अड़चनों के बाद आखिरकार समाधान का रास्ता निकाल लिया गया है। प्रभावित कृषकों को अब 6 प्रतिशत विकसित भूमि और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित 20 प्रतिशत भूखण्ड दिए जाएंगे। साथ ही, श्मशान के निकट आवंटित भूखण्डों को अन्यत्र स्थानांतरित कर योजना के मानचित्र में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। बोर्ड का यह निर्णय 21 वर्षों की रुकी परियोजना को पुनः जीवित कर लगभग 4000 करोड़ की परिसंपत्तियों को अनलॉक करेगा।
इसी कड़ी में, गाजियाबाद की औद्योगिक पहचान को और मजबूत करने के लिए ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डीलना में लगभग 251 हेक्टेयर भूमि पर अत्याधुनिक औद्योगिक टाउनशिप-सह-लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया। इससे न केवल निवेश को नई दिशा मिलेगी बल्कि हज़ारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
शहर की बढ़ती जनसंख्या और आवासीय मांग को देखते हुए बोर्ड ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया। लगभग बीस वर्ष बाद गाजियाबाद को नई आवासीय योजना ‘हरनन्दीपुरम’ मिलने जा रही है। इसमें आठ गांवों की भूमि सम्मिलित की जाएगी, जिसमें से अधिकतर भूमि आपसी सहमति से खरीदी जाएगी और शेष भूमि का अधिग्रहण भू-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 के तहत किया जाएगा। यह योजना आम जनता के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
जनसामान्य की सामाजिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बैठक में ‘उत्सव भवन’ के निर्माण और संचालन का भी निर्णय लिया गया। यह आधुनिक सामुदायिक केन्द्र होगा जहाँ शादी-ब्याह, पारिवारिक और सामाजिक कार्यक्रम किफायती दरों पर आयोजित किए जा सकेंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सकारात्मक पहल के तहत ग्राम डासना स्थित सुन्दरदीप एजुकेशनल सोसाइटी की लगभग 8.93 हेक्टेयर भूमि को ‘कृषि’ से ‘संस्थागत’ भू-उपयोग में परिवर्तित करने की मंजूरी दी गई, जिससे शिक्षा और अनुसंधान को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके साथ ही, गाजियाबाद, लोनी और मोदीनगर महायोजना-2031 के अंतर्गत शेष क्षेत्रों के जोनल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने हेतु कंसलटेंट्स के चयन का प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ। इससे शहर के सुनियोजित विकास की रूपरेखा और मज़बूत होगी।
इन सभी फैसलों के साथ गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में गाजियाबाद न केवल किफायती आवास और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, बल्कि उद्योग, शिक्षा और सामाजिक ढाँचे के मामले में भी प्रदेश में मिसाल कायम करेगा

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