राजेश बैरागी।क्या ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण निकट दृष्टि दोष का शिकार हो गया है? दरअसल यह प्रश्न प्राधिकरण के उस निर्णय को लेकर उठ खड़ा हुआ है जिसके तहत वह इसरो की मदद से अपने क्षेत्र में अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण का पता लगाएगा। इसके लिए प्राधिकरण साठ लाख रुपए की भारी-भरकम धनराशि का भुगतान करेगा जबकि एक वर्ष पहले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण यही प्रयोग कर मुंह की खा चुका है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का निकट दृष्टि दोष यह है कि प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में वर्षों से हो रहू अतिक्रमण और अवैध निर्माण उसे खुली आंखों से दिखाई नहीं देता। ग्रेटर नोएडा की जीवनरेखा मानी जाने वाली 130 मीटर रोड के दोनों ओर दिनदहाड़े अवैध कॉलोनियों का जाल बुना जा रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। दादरी बाईपास पर धूम मानिकपुर और चिटेहरा गांव की हजारों एकड़ भूमि पर औद्योगिक पार्क बनाए और बेचे जा रहे हैं परंतु किसी को दिखाई नहीं दे रहे। इन सबके बारे में प्राधिकरण को रोजाना शिकायतें मिलती हैं, समाचार माध्यमों तथा सोशल मीडिया पर आवाज उठाई जा रही हैं परंतु किसी को सुनाई नहीं देता। गुलिस्तानपुर और प्राधिकरण के ठीक सामने एच्छर गांव में अवैध बिल्डरों द्वारा अवैध कॉलोनी, हाउसिंग सोसायटी, फ्लैट, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना दिए गए हैं और किसी को कानों-कान खबर नहीं है। इस सब को दरकिनार कर प्राधिकरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर स्थापित करने जा रहा है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने भी एक वर्ष पहले इसी एजेंसी से अपने क्षेत्र के अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण को खोजने का करार किया था। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस एजेंसी से मिला डाटा किसी काम का नहीं है। यह एजेंसी ऊपर के प्रभाव से कांट्रेक्ट हासिल कर लेती है। ग्रेटर नोएडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने बताया कि इस कार्य के लिए एजेंसी को साठ लाख रुपए भुगतान किए जाएंगे।प्राधिकरण का दावा है कि यह एजेंसी उसे क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण की सटीक जानकारी देगी। इसके माध्यम से प्राधिकरण अपनी अतिक्रमण में घिरी भूमि भी खोज सकेगा।तो प्राधिकरण का भारी-भरकम अभियांत्रिकी विभाग और भूलेख विभाग क्या कर रहे हैं। दादरी बाईपास पर धड़ल्ले से बसाए जा रहे औद्योगिक पार्कों पर कार्रवाई को लेकर एक निचले स्तर के अधिकारी का बयान था कि उसे ऊपर से सिग्नल नहीं मिल रहा है।तो क्या इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर स्ट्राइक भी खुद करेगा?इसी महीने होने जा रहे एम ओ यू में यह शर्त शामिल नहीं है।








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