राजेश बैरागी।जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर में बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव ने इस कड़कड़ाती ठंड में भी गर्मी उत्पन्न कर दी है। एक वर्ष के लिए अध्यक्ष व सचिव समेत सात पदाधिकारियों के होने वाले चुनाव में पैसा तो पानी की भांति बहाया ही जा रहा है परंतु असली तड़का स्थानीय जनप्रतिनिधि लगा रहे हैं। कोई किसी को जिताने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है तो कोई किसी को हराने के लिए पूरा जोर लगा रहा है।
जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन का हर वर्ष होने वाला चुनाव जनपद की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। बार अध्यक्ष का दायरा केवल जिला न्यायालय तक सीमित नहीं होता है बल्कि वह राजनीतिक और पुलिस प्रशासन की व्यवस्था में भी अहम भूमिका निभाता है। इसीलिए प्रतिवर्ष होने वाले इस चुनाव पर न केवल सभी की निगाहें लगी होती हैं बल्कि इस चुनाव को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावित भी किया जाता है। वर्तमान में चल रहे बार चुनाव में दो पैनल प्रमुख रूप से मैदान में हैं। अध्यक्ष पद पर योगेन्द्र भाटी और मनोज भाटी आमने-सामने हैं। दोनों में कई समानताएं हैं। मसलन दोनों पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं, दोनों गुर्जर बिरादरी और भाटी गौत्र से हैं और दोनों मूलरूप से दादरी तहसील के गांवों के निवासी हैं। दोनों में कई असमानताएं हैं जिनमें एक बड़ी असमानता दोनों का स्वभाव है। योगेन्द्र भाटी वरिष्ठ अधिवक्ता होने के साथ भद्र और मिलनसार प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। मनोज भाटी आक्रामक और तेज स्वभाव के हैं। जिला न्यायालय में कार्यरत अधिकांश युवा अधिवक्ता उनसे प्रभावित हैं परंतु न्यायालय में अधिकांश मुकदमों में उनकी उपस्थिति से आतंकित भी रहते हैं। दोनों पैनलों ने चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। योगेन्द्र भाटी को कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन बताया जा रहा है जबकि मनोज भाटी को हराने के लिए भी कुछ जनप्रतिनिधि पूरा जोर लगा रहे हैं। मनोज भाटी के पास इस विरोध का कोई तोड़ नहीं है
जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर:बार एसोसिएशन चुनाव में जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेप!









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