कलेक्ट्रेट का इतिहास और महत्व

राजेश बैरागी।जिला मुख्यालय या जिला प्रशासन मुख्यालय का आम नागरिक के जीवन में क्या स्थान होता है? क्या यह एक विरासत है जिसे और प्रभावशाली बनाया जाना चाहिए? दरअसल बीते गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह में हाथरस के युवा जिलाधिकारी अतुल वत्स ने जो भाषण दिया उसमें उन्होंने कलेक्ट्रेट के महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया। यह एक ऐसी असाधारण सी बात थी जिसपर आमतौर पर कम ही ध्यान दिया जाता है। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार
कलेक्ट्रेट (Collectorate) का अर्थ जिलाधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट का कार्यालय है, जिसे हिंदी में समाहरणालय या जिलाधिकारी कार्यालय कहा जाता है। यह जिले के प्रशासनिक, राजस्व और कानून-व्यवस्था के कार्यों का मुख्य केंद्र होता है। भारत में इस पद की स्थापना 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा की गई थी।जिसे 1773 में समाप्त किया गया लेकिन 1781 में फिर से स्थापित किया गया।1947 के बाद भी, कलेक्टर की भूमिका जारी रही, लेकिन अब यह केवल कर संग्रह तक सीमित न रहकर विकास और कानून व्यवस्था के लिए भी जिम्मेदार है।यह वह स्थान है जहाँ से जिला कलेक्टर अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हैं।इसका मुख्य उद्देश्य भूमि राजस्व, कराधान, कानून व्यवस्था, सामान्य चुनाव, और विकास परियोजनाओं का प्रबंधन करना है।
 हाथरस जिलाधिकारी अतुल वत्स ने इस अवसर पर कहा कि कलेक्ट्रेट केवल एक कार्यालय नहीं है, बल्कि एक परिवार है। यहां सभी का सहयोग हमारे कार्यों को बेहतर बनाने में अत्यंत आवश्यक है। कलेक्ट्रेट एक ऐतिहासिक संस्था है, जो हमें विरासत में मिली है और जिसे हम पिछले 76 वर्षों से पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनपद का कोई भी नागरिक कलेक्ट्रेट आए, तो उसे यह अनुभव हो कि यहाँ उसे सम्मान, संवेदनशीलता और अपनत्व मिलेगा।

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