राजेश बैरागी।मैं उनसे लगभग छः माह पूर्व पहली बार मिला। विकास प्राधिकरणों में आमतौर पर शीर्ष पद पर नियुक्त व्यक्ति के अतिरिक्त सभी अधिकारियों को लो प्रोफाइल माना जाता है बशर्ते कि किसी अधिकारी की विशेष ख्याति न हो। लिहाजा पत्रकारों का भी अन्य अधिकारियों से मिलना जुलना कम ही रहता है और जहां डॉ अरुण वीर सिंह जैसे बेहद मिलनसार अधिकारी शीर्ष पद पर हों तो अन्य अधिकारी और भी नेपथ्य में चले जाते हैं। यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के तौर पर नगेंद्र प्रताप सिंह सिंह से पहली मुलाकात के बाद ही उनसे निकटता अनुभव हुई। दरअसल आईएएस अधिकारी होने के साथ साथ उनकी अध्यात्म में गहरी रुचि होने से मैंने निकटता अनुभव की थी। उनके पिछले कार्यकालों के बारे में अक्सर बातें होती थीं। जैसे सभी अधिकारी अपने कार्यकालों की अच्छी अच्छी बातें बताया करते हैं, उन्होंने भी बतायीं। मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहने के दौरान उन्होंने स्वयं के द्वारा कराये गये अनेक कार्य गिनाए।उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता कि इस हिंदू तीर्थ क्षेत्र के लिए उनसे पहले जैसे किसी ने कुछ किया ही नहीं था। परंतु केवल कहने भर से मान ले,वह पत्रकार कैसे हो सकता है। इसलिए वस्तुस्थिति जानने के लिए बीते नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में मैंने अपने दो साथी पत्रकारों के साथ मथुरा-वृन्दावन-गोवर्धन,कोकिलावन, रसखान समाधि आदि स्थानों का दो दिवसीय दौरा किया। स्वयं को पत्रकार बताए बगैर कृष्ण जन्मभूमि, श्री बांके बिहारी मंदिर, गोवर्धन परिक्रमा पथ, कोकिला वन आदि स्थानों पर वहां के प्रभारी पदाधिकारियों, कर्मचारियों यहां तक कि सफाईकर्मियों से नगेंद्र प्रताप सिंह के बारे में तफ्तीश की तो पता चला कि कैसे कोई अधिकारी अपने व्यवहार और कार्यों की विरासत छोड़कर जाता है। केवल यह बताने भर से कि हम लोग ग्रेटर नोएडा से आए हैं,वो लोग कहते कि वहां तो हमारे नगेंद्र सर भी तो हैं। गोवर्धन परिक्रमा पथ को मैंने बीस पच्चीस वर्ष पहले से बहुत खराब स्थिति में देखा था। परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु तीर्थाटन के कष्टों को ईश्वर तक पहुंचने की अनिवार्यता मानते हुए यात्रा पूरी करते थे। रास्ते की गंदगी से उन्हें नफरत नहीं होती थी बल्कि उससे बचकर चलने को संभवतः वे जीवन के पापों से बचना समझते थे। नगेंद्र प्रताप सिंह ने न केवल परिक्रमा पथ का विकास कराया बल्कि उसकी साफ-सफाई की क्षेत्र के क्षमतावान लोगों के सहयोग से स्थाई व्यवस्था कराई। एक संस्था ‘उज्ज्वल बृज’ का गठन किया जिसका अध्यक्ष तो परिषद का सीईओ ही होता है परंतु उसके सदस्य क्षेत्र के क्षमतावान और निष्ठावान लोग होते हैं। अब परिक्रमा पथ के प्रत्येक एक किलोमीटर में तीन सफाईकर्मी तैनात रहते हैं।पथ पर पेयजल और जनसुविधा केंद्र बने हुए हैं। वृंदावन में तीर्थयात्रियों के लिए स्थाई आश्रय स्थल बना है जहां पांच छः सौ लोग एक साथ ठहर सकते हैं।कोकिलावन का प्रसिद्ध शनि मंदिर का पुनरुद्धार हो रहा है।हम लोग पत्रकारीय स्वभावानुसार उनकी कमियां भी तलाशते रहे परंतु सफल नहीं हुए।हो सकता है कि यह हमारी असफलता ही हो। परंतु अच्छे अधिकारी की कमी न ढूंढ पाने की असफलता भी सफलता ही है। उन्हें आगरा के मंडलायुक्त की जिम्मेदारी मिलने की हार्दिक शुभकामनाएं
मेरी दृष्टि में:आगरा के नये मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह









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