राजेश बैराग।क्या अदालतों को जमानत अर्जी खारिज करने के लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना चाहिए? जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अदालत को मुख्यतया तीन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। पहला -क्या गिरफ्तार अभियुक्त प्रथमदृष्टया अपराध में संलिप्त दिखाई दे रहा है? दूसरा -क्या उसके द्वारा खुला रहने पर मामले के साक्ष्यों और गवाहों से छेड़छाड़ की जा सकती है?और तीसरा -क्या जमानत पर रिहा होने पर उसके ग़ायब होने की आशंका है? नोएडा के सेक्टर 150 में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी के एक भूखंड में अवैध रूप से भरे पानी में डूबकर हुई इंजीनियर युवराज की मौत मामले में गिरफ्तार बिल्डर कुंवर अभय सिंह की जमानत अर्जी गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने खारिज कर दी है।उसे घटना के दो दिन बाद गत 20 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उसे तीन बार जेल से तलब किया, पुलिस से कुछ बिंदुओं पर बार बार जवाब मांगे जो अभी तक नहीं मिले हैं और अंततः अदालत ने उसे जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में लिखा -मामला सत्र परीक्षणीय,अजमानतीय तथा गंभीर प्रकृति का है।इसी मामले में गिरफ्तार दो अन्य लोगों रवि बंसल और सचिन करणवाल की भी न्यायिक हिरासत अवधि आज तीन दिन के लिए और बढ़ा दी गई। उल्लेखनीय है कि युवराज मौत मामले में यह सवाल अब और भी रहस्यमय हो चला है कि इस घटना के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार है।मेरठ जोन के अपर महानिदेशक पुलिस भानु भास्कर के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल द्वारा जांचोपरांत तैयार की गई रिपोर्ट अभी अधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है।









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