राजेश बैरागी।देश विदेश में विख्यात नोएडा शहर के एक सेक्टर में पानी से भरे एक गड्ढे में डूबने से हुई इंजीनियर युवराज की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या यह मामला ‘होनी को जो मंजूर था’ से संबंधित है या इसके लिए कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण जैसे संस्थान जिम्मेदार हैं? पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे गए बिल्डर कुंवर अभय सिंह की जमानत अर्जी, बिल्डर निर्मल सिंह के दो कर्मचारियों की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका तथा फ्रॉड बिल्डर निर्मल सिंह के विरुद्ध जारी गैर-जमानती वॉरंट को रद्द करने की याचिका पर गौतमबुद्धनगर के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आज सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया जबकि सांसद डॉ महेश शर्मा ने जिले के अधिकारियों को चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स को दुरुस्त न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई तो नोएडा प्राधिकरण के नवनियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने मातहत अधिकारियों को सड़क, गड्ढे सीवर सभी को तत्काल दुरुस्त करने का हुक्म दिया।
युवराज की मौत के चलते एक सप्ताह तक अफरातफरी में रहे गौतमबुद्धनगर जिले का प्रशासन गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के बाद कलंक का पर्याय बने कारणों को दूर करने के लिए कमर कसने लगा है। हालांकि एक लड़ाई अदालत में भी चल रही है जहां इस मामले में गिरफ्तार लोगों की जमानत और गिरफ्तारी पर कानूनी बहसों का दौर जारी है। आज मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव त्रिपाठी की अदालत में गिरफ्तार बिल्डर कुंवर अभय सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस और प्राधिकरण को गिरफ्तार नहीं किया गया है जबकि उन्हें बार-बार घटनास्थल पर भर रहे पानी को लेकर चेताया गया था।इसी प्रकार बिल्डर से संबंधित दो लोगों की गिरफ्तारी को चुनौती दी गई।उन दोनों लोगों को पुलिस ने आज पांच दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत में पेश किया था। आज ही सीजेएम की अदालत में फ्रॉड बिल्डर निर्मल सिंह के विरुद्ध गैर-जमानती वॉरंट जारी करने को भी चुनौती दी गई। बताया गया कि निर्मल सिंह कभी उस कंपनी में निदेशक था ही नहीं जिसके भूखंड में भरे पानी में डूबकर युवराज की मौत हुई है। अदालत ने सुनवाई के बाद सभी याचिकाओं पर निर्णय सुरक्षित रख लिया है। आज ही जिला स्तरीय सांसद सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम् बैठक नोएडा स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में हुई। इस बैठक में पहले से चिन्हित 152 ब्लैक स्पॉट्स को दुरुस्त न करने के लिए सांसद डॉ महेश शर्मा ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण तथा पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इन 152 ब्लैक स्पॉट्स के बारे में गत वर्ष नवंबर माह में प्राधिकरणों और पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा था परंतु किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी थी। युवराज की मौत न होती तो अभी भी शायद ही इस जानलेवा समस्या पर कोई ध्यान देता। उधर नोएडा प्राधिकरण के नवनियुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने भी आज ही अपने मातहत सभी विभागों के अधिकारियों संग प्राधिकरण क्षेत्र के सभी चिन्हित असुरक्षित स्थलों को तत्काल दुरुस्त करने के आदेश दिए।इन सब कवायदों के बीच युवराज की मौत एक पहेली बनती जा रही है। कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण युवराज की मौत के लिए अपनी जिम्मेदारी मानने को तैयार नहीं हैं। इस मामले में गठित विशेष जांच दल को तीनों के द्वारा सौंपी गई अपनी अपनी रिपोर्ट में अपनी नाकामी या लापरवाही को नहीं स्वीकारा गया है। तो क्या युवराज नियति के विधान का शिकार हुआ? क्या यह एक्ट ऑफ गॉड था या एक्ट ऑफ इरिस्पोंसेबल सिस्टम के कारण हुई मौत थी? यही प्रश्न हर गली चौराहे पर अपना उत्तर तलाश रहा है
एक्ट ऑफ गॉड और एक्ट ऑफ इरिस्पोंसेबल सिस्टम पर अटक गया है इंजीनियर युवराज की मौत का मामला









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