अब गौतमबुद्धनगर जिले में अपना आपदा प्रबंधन करने पर विचार

राजेश बैरागी।इंजीनियर युवराज की नोएडा के सेक्टर 150 स्थित एक बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर हुई मौत की घटना को प्रशासनिक विफलता के पायदान से नीचे धकेलने के प्रयासों के विपरीत जिले में कार्यरत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यहां ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए स्थाई और ठोस उपाय करने पर भी विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जिले की दिल्ली से निकटता, औद्योगिक क्षेत्र होने तथा जनसंख्या के घनत्व को देखते हुए एक ऐसे त्वरित कार्यबल को तैयार किए जाने पर मंथन किया जा रहा है जो न केवल साधनों से परिपूर्ण हो बल्कि चौबीसों घंटे उपलब्ध भी रहे।
इस संबंध में अग्रणी भूमिका निभाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी ने जिलाधिकारी मेधा रूपम से जिला गौतमबुद्धनगर की आवश्यकताओं के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन उपायों पर विचार विमर्श किया है। यह क्षेत्र सिस्मिक जोन 4 में होने के कारण आपदा संभावित क्षेत्र पहले से ही है। यहां बढ़ रही आबादी, औद्योगीकरण तथा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसी योजनाओं के साकार होने के साथ दुर्घटनाओं व आपदाओं की संख्या में भी वृद्धि हो सकती है। इंजीनियर युवराज को एक मामूली से गड्ढे में डूबने देने से यहां कार्यरत कमिश्नरेट पुलिस, दमकल और राज्य आपदा मोचन बल की कार्य क्षमताओं तथा गैर पेशेवर अंदाज ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। छोटी से छोटी उपलब्धियों को सराहनीय कार्य बताकर अपनी पीठ ठोंकने वाली कमिश्नरेट पुलिस युवराज को बचाने के लिए किंकर्तव्यविमूढ़ क्यों थी,यह एक बड़ा प्रश्न है। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण युवराज के नशे में होने,कार की रफ्तार तेज होने जैसे कुतर्कों से इस विफलता की सच्चाई को झुठलाने में जुट गए। इससे आम नागरिकों से लेकर मीडिया, सोशल मीडिया और सामाजिक चिंतकों का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भविष्य के लिए कार्ययोजना पर विचार करने की बात राहत देने वाली है। बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा सीईओ ने जिलाधिकारी से आपदा प्रबंधन व्यवस्था की अध्यक्ष होने के नाते तत्काल एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने तथा ठोस उपाय करने का सुझाव दिया है

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