इंजीनियर युवराज की गैर इरादतन हत्या मामला:स्पोर्ट्स सिटी और निर्मल सिंह के भ्रष्टाचार पर क्या होगी कार्रवाई

राजेश बैरागी।क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बना विशेष जांच दल (एस आई टी) नोएडा सेक्टर 150 के एक बेसमेंट में रविवार रात डूबने से हुई इंजीनियर युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में ला सकेगा? यह प्रश्न इसलिए प्रासंगिक है कि युवराज की मौत को चाहे तो एक हादसा मानकर छोड़ भी दिया जाए परंतु सेक्टर 150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है और असली गुनहगार निर्मल सिंह अरबों रुपए डकारने के बावजूद न प्राधिकरण के हत्थे चढ़ पाया था और न अब पुलिस को ही हाथ लग पा रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी एसआईटी ने आज नोएडा पहुंचकर जांच शुरू कर दी। आज ही पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने भी घटनास्थल का दौरा किया। क्या इतने बड़े पैमाने पर जांच शुरू होने और स्वयं पुलिस कमिश्नर द्वारा घटनास्थल का दौरा करने से न्याय की आस नहीं बंधती? दरअसल नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में कहीं भी स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर बिल्डरों द्वारा खरीदे गए भूखंड विकसित नहीं हो पाए हैं। नोएडा के सेक्टर 150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी का भूखंड तो भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी,अमानत में खयानत और धनशोधन का एक जीता जागता उदाहरण है। यह भूखंड थ्री सी फेम निर्मल सिंह को बेचा गया था। नियमानुसार इस भूखंड के 30 प्रतिशत हिस्से पर आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां की जानी थीं जबकि 70 प्रतिशत हिस्से पर खेल,योग आदि गतिविधियों का विकास किया जाना था। निर्मल सिंह ने इस भूखंड पर निर्माण और प्राधिकरण का बकाया चुकाने के लिए एक निजी वित्तीय संस्थान से साढ़े चार सौ करोड़ रुपए का कर्ज लिया और सारा पैसा खुद ही डकार गया। प्राधिकरण ने कर्ज लेने के लिए निर्मल सिंह को भूखंड गिरवी रखने की अनुमति जारी की और भूल गया। निर्मल सिंह ने इस भूखंड को 24 हिस्सों में बांट कर गोदरेज, प्रतीक ग्रुप जैसे बिल्डरों को बेच दिया और वह पैसा भी डकार गया।अब कर्ज के झगड़े हैं, फ्लैट और व्यवसायिक संपत्तियों के खरीदारों के झगड़े हैं जो विभिन्न न्यायालयों में चल रहे हैं। स्पोर्ट्स सिटी अधूरी और उजाड़ पड़ी है क्योंकि प्राधिकरण अब किसी प्रकार की अनुमति जारी नहीं कर रहा है। क्या आप जानते हैं कि प्राधिकरण के कई विभागों में निर्मल सिंह के लोग कार्यरत हैं जिन्हें निर्मल सिंह ही वेतन भुगतान करता है? एसआईटी को जांच पांच दिन में करनी है। क्या इन पांच दिनों में प्राधिकरण का कोढ़ बनी स्पोर्ट्स सिटी का सच सामने आ पाएगा? जिस बेसमेंट में डूबकर युवराज की मौत हुई, उसके स्वामी कुंवर अभय सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि उसने अपने भूखंड में अवांछित आवागमन को रोकने के लिए बेरीकेडिंग की थी परंतु नोएडा प्राधिकरण ने उसपर ऐसा करने के लिए छः लाख रुपए की पेनाल्टी लगा दी थी। पेनाल्टी क्यों लगी, यह भ्रष्टाचार की एक और कथा है जिसे अगली पोस्ट में सुनाऊंगा

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